दिल्ली-NCR वायु प्रदूषण मामलों की अब अलग होगी सुनवाई, NGT ने तय की 3 और 17 नवंबर की तारीख
नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली-NCR समेत देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अपनी सुनवाई का ढांचा बदल दिया है। अब प्रदूषण से जुड़े अलग-अलग मुद्दों की अलग-अलग सुनवाई होगी, ताकि मामलों के आपस में उलझने और सुनवाई में देरी को रोका जा सके। NGT ने दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता से जुड़े मामलों की अलग सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है, जबकि अन्य वायु प्रदूषण संबंधी मामलों पर 3 नवंबर को सुनवाई होगी।
NGT ने 24 अगस्त को पारित किया आदेश
NGT की मुख्य बेंच, जिसके प्रमुख चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफ़रोज़ अहमद हैं, ने 24 अगस्त को यह आदेश पारित किया। यह आदेश दिल्ली-NCR और देश के अन्य हिस्सों में वायु प्रदूषण से जुड़े कई मामलों की सुनवाई के दौरान दिया गया।ट्रिब्यूनल ने लंबे समय से चल रहे MC मेहता बनाम भारत सरकार वायु प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट के 12 मार्च के आदेश पर ध्यान दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 1985 की कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया था और निर्देश दिया था कि वायु प्रदूषण के विभिन्न पहलुओं से अधिक व्यवस्थित तरीके से निपटने के लिए पांच नए 'सुओ मोटो' (स्वतः संज्ञान) मामले दर्ज किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण के मुद्दों को अलग-अलग बांटा
सुप्रीम कोर्ट के सामने पांच नई कार्यवाहियों का उद्देश्य वायु प्रदूषण के लिए रेगुलेटरी और पॉलिसी फ्रेमवर्क, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, ग्रीन कवर (हरियाली) के संरक्षण और विस्तार, निर्माण गतिविधियों, बिजली संयंत्रों और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण; और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, फसल अवशेष जलाने और पटाखों से जुड़े मुद्दों की अलग-अलग जांच करना है।
पुराने मामले का दायरा बढ़ने से न्यायिक दक्षता प्रभावित होने की आशंका
सुप्रीम कोर्ट ने देखा था कि मूल मामले का दायरा पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया था, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर बड़ी संख्या में आवेदन दायर किए गए थे। आदेश के अनुसार, एक ही ऐतिहासिक मामले के तहत इन सभी मामलों से निपटने से प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा हो गई थीं और इससे न्यायिक दक्षता प्रभावित हो सकती थी।
नए सुओ मोटो मामलों के जरिए उठाए जाएंगे बाकी मुद्दे
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया कि बचे हुए मुद्दों को नई 'सुओ मोटो' कार्यवाहियों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए। साथ ही, उसने यह भी स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण पर उसके पहले के निर्देश भविष्य के किसी भी आदेश, संशोधन या स्पष्टीकरण के अधीन लागू रहेंगे। इसके बाद, NGT ने अपने पास लंबित वायु प्रदूषण से जुड़े विभिन्न मामलों पर विचार किया और उन क्षेत्रों की पहचान की जहां उनके मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
दिल्ली-NCR से अलग होंगे अन्य शहरों के प्रदूषण मामले
ट्रिब्यूनल ने देखा कि 'नॉन-अटेनमेंट' शहरों (जहां हवा की गुणवत्ता तय मानकों से खराब है) और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के बाहर के प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता से जुड़े मामलों की जांच, विशेष रूप से दिल्ली-NCR से संबंधित मुद्दों से अलग की जा सकती है। इसी तरह, पूरे देश में लगातार बने हुए वायु प्रदूषण के बड़े मुद्दे पर NCR के बाहर भी विचार किया जा सकता है, जबकि दिल्ली से जुड़े मामलों पर कार्रवाई M.C. मेहता मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही होगी।
दिल्ली-NCR मामलों की 17 नवंबर और अन्य की 3 नवंबर को सुनवाई
इसके बाद NGT ने निर्देश दिया कि दिल्ली-NCR और दिल्ली की हवा की गुणवत्ता से जुड़े मामलों को मौजूदा मामलों के समूह से अलग किया जाए और 17 नवंबर को उनकी अलग से सुनवाई की जाए। वायु प्रदूषण से जुड़े अन्य मामलों पर 3 नवंबर को सुनवाई होगी। NGT की कार्यवाही में बताए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश में M.C. मेहता मामले के विकासक्रम का भी ज़िक्र है। यह मामला मूल रूप से 1985 में दायर किया गया था और शुरू में इसका ध्यान NCR और उसके आस-पास चल रहे प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर था। समय के साथ, इसका दायरा बढ़कर वायु प्रदूषण के कई पहलुओं, जैसे वाहनों से होने वाले प्रदूषण, तक फैल गया।
BS मानकों से साफ ईंधन तक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से हुए कई उपाय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले की कार्यवाही से हवा की गुणवत्ता सुधारने के कई उपायों को लागू करने में मदद मिली, जिनमें भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक, सार्वजनिक परिवहन का विस्तार और साफ़ ईंधन का इस्तेमाल, वाहनों की उम्र से जुड़ी पाबंदियाँ, प्रदूषण फैलाने वाले बिजली संयंत्रों से जुड़े उपाय और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के कदम शामिल हैं।
CAQM और GRAP के जरिए
अदालत ने वायु प्रदूषण के अलग-अलग स्तरों से निपटने के लिए समन्वित उपायों के तहत 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग' (CAQM) के गठन और 'ग्रेडेड एक्शन रिस्पॉन्स प्लान' (GRAP) को लागू करने पर भी जोर दिया। (Source: ANI)
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