राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने किश्तवार में हुए

एनआईए ने किश्तवार आतंकी हमले में दाखिल किया आरोपपत्र, पाकिस्तान से जुड़े साजिश के तार

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नई दिल्ली (भारत)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बुधवार को जम्मू स्थित एनआईए विशेष न्यायालय में किश्तवार आतंकी हमले के मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीर अहमद और मारे गए तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। यह आरोपपत्र 22 फरवरी को किश्तवार जिले के पासेर कोट के चतरू, वानी मोहल्ला में हुए आतंकवादी हमले से संबंधित है।

535 पन्नों की आरोपपत्र में तीन मृत आतंकवादियों की भूमिका

535 पन्नों की आरोपपत्र में साजिश और तीन मृत आतंकवादियों की भूमिकाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिनमें पाकिस्तान निवासी और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल हैं, साथ ही मनीर अहमद के खिलाफ सहायक सबूत भी दिए गए हैं। इसमें जम्मू और कश्मीर के पहाड़ी किश्तवार जिले में सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमलों में शामिल आतंकवादियों को स्वेच्छा से शरण देने और छिपाने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मनीर अहमद पर आरोप लगाया गया है।

हमले में सैफुल्लाह के नेतृत्व में तीन आतंकवादी शामिल

एनआईए ने आरोपी आतंकवादियों के खिलाफ सीमा पार से साजिश रचने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में आपराधिक धाराओं को भी लागू किया है। इस हमले में सैफुल्लाह के नेतृत्व में तीन आतंकवादी शामिल थे, जो कश्मीर टाइगर्स (अज़राएल ग्रुप) से जुड़ा था, जो जैश-ए-मोहम्मद के अधीन काम करने वाला एक गुट है। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकवादी मारे गए। किश्तवार जिले के ऊपरी इलाकों में सक्रिय यह समूह कई हमलों में शामिल था, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय लोगों की मौत हुई, और इस मॉड्यूल को मनिर अहमद द्वारा रसद संबंधी सहायता प्रदान की गई थी।

मामले की आगे की जांच अभी जारी

लगभग पांच महीने तक चली एनआईए की जांच में इस मामले की मुख्य साजिश का संबंध पाकिस्तान से पाया गया । मामले की आगे की जांच अभी जारी है। एक अलग घटनाक्रम में, एनआईए की एक विशेष अदालत ने 8 अक्टूबर को थाई नागरिक और अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्कर विली नारुएनार्टवानिच उर्फ ​​विली को यूएपीए के तहत नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय हथियार खरीद षड्यंत्र के संबंध में छह साल की कैद की सजा सुनाई। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने विली को साजिश रचने के लिए तीन साल, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी करने के लिए दो साल और आतंकी साजिश रचने के लिए दो साल की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला शुरू में 2011 में दर्ज किया गया था।

(इनपुटः ANI)

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