'राजधानियों से नहीं चलेंगे शहर', नीति आयोग के राजीव गौबा बोले- निकायों को मिलें सीधे अधिकार
नई दिल्ली। देश की तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर सुविधाएं देने के लिए नीति आयोग ने शहरी प्रशासन व्यवस्था में बड़े और क्रांतिकारी बदलावों की जरूरत बताई है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने स्पष्ट कहा कि शहरों का संचालन राज्यों की राजधानियों से बैठकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्थानीय निकायों को वित्तीय स्वतंत्रता और अधिक अधिकार देने होंगे।
दूसरे 'नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव' के समापन सत्र में बोलते हुए राजीव गौबा ने दोटूक अंदाज में कहा कि स्थानीय निकायों को जब तक प्रशासनिक और वित्तीय मजबूती नहीं मिलेगी, तब तक शहरों का व्यवस्थित विकास संभव नहीं है।
नीति आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, गौबा ने मजबूत शहरी शासन प्रणाली के लिए पांच साल के निश्चित कार्यकाल वाले प्रत्यक्ष निर्वाचित मेयर (Directly Elected Mayors), 'मेयर-इन-काउंसिल' व्यवस्था और नियमित नगर निकाय चुनाव कराने का सुझाव दिया।
74वें संविधान संशोधन को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग
राजीव गौबा ने राज्यों से आग्रह किया कि वे 74वें संविधान संशोधन में उल्लिखित सभी 18 बुनियादी कार्यों को तुरंत शहरी स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करें। इनमें शहरी नियोजन (Urban Planning), जलापूर्ति, अग्निशमन सेवाएं और यातायात प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं।
यह प्रशासनिक पहल इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि भारत की शहरी आबादी वर्तमान के लगभग 50 करोड़ से बढ़कर 2050 तक 85 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। तब तक देश की करीब आधी आबादी शहरों में निवास कर रही होगी।
सेवा वितरण और शहरी वित्तपोषण में सुधार बेहद जरूरी
नीति आयोग और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की संयुक्त रिपोर्ट 'मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव City Governance' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय निकायों का सशक्तिकरण पहली शर्त है। शहरी वित्तपोषण पर बात करते हुए गौबा ने नगर निकायों के कम राजस्व संग्रह पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सलाह दी:
- संपत्ति कर (Property Tax) की वसूली में सुधार लाया जाए।
- यूजर-चार्ज (उपयोग शुल्क) की बेहतर रिकवरी हो।
- राज्य सरकारें अपने राजस्व का बड़ा हिस्सा स्थानीय निकायों को ट्रांसफर करें।
किफायती आवास और रियल एस्टेट नियमों में राहत
बढ़ती आबादी के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने भवन नियमों और भूमि-उपयोग नीतियों में ढील देने की सिफारिश की। इसमें 'फ्लोर एरिया रेशियो' (FAR) के कड़े नियमों को आसान बनाना, 'मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट' को बढ़ावा देना और मेट्रो या ट्रांजिट हब के आसपास निर्माण कार्यों को गति देना शामिल है।
साथ ही, उन्होंने राज्यों से 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' (आदर्श किरायेदारी कानून) अपनाने की अपील की, जिससे देश के लाखों प्रवासी मजदूरों, औद्योगिक कामगारों, छात्रों और युवा पेशेवरों को आसानी से सस्ता किराये का मकान मिल सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को अपनी शहरी विकास योजनाओं (Urban Missions) की फंडिंग को इन सुधारात्मक कदमों के क्रियान्वयन से जोड़ देना चाहिए। ये सभी बदलाव शहरों को देश के आर्थिक विकास का पावरहाउस बनाएंगे और 'विकसित भारत 2047' के विजन को मजबूती देंगे। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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