₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, 96% ट्रांजैक्शन दायरे में
नई दिल्ली (भारत)। केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देते हुए ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क लगाने पर रोक लगा दी है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता पैसे भेजने या प्राप्त करने वाले ग्राहक से कोई शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। इस फैसले के दायरे में मात्रा के हिसाब से करीब 96 प्रतिशत UPI ट्रांजैक्शन आएंगे।
भुगतान करने या लेने वाले से शुल्क पर रोक
अधिसूचना में कहा गया है कि कोई भी बैंक या सिस्टम प्रदाता इन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के जरिए भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकता। केंद्र सरकार ने यह अधिसूचना भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जारी की है।
96% UPI लेनदेन ₹2,000 तक
उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, UPI लेनदेन का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा ₹0 से ₹2,000 के मूल्य वर्ग में आता है। इसका मतलब है कि ज्यादातर UPI लेनदेन अधिसूचना के तहत शुल्क से सुरक्षित सीमा में आते हैं। पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M सेगमेंट में भी उद्योग के अनुमानों के अनुसार केवल करीब 4 प्रतिशत लेनदेन ₹2,000 से अधिक के हैं। ऐसे में करीब 96 प्रतिशत लेनदेन ₹2,000 की सीमा के भीतर रहते हैं।
₹2,000 से ज्यादा UPI पर क्या होगा?
अधिसूचना में ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन के लिए MDR (Merchant Discount Rate) को निर्धारित या लागू नहीं किया गया है। मुख्य प्रावधान यह है कि बैंक और सिस्टम प्रदाता ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते। सका मतलब है कि अधिसूचना में ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन के लिए शुल्क तय करने का कोई अलग ढांचा नहीं दिया गया है। अधिसूचना सिर्फ ₹2,000 तक के लेनदेन पर शुल्क न लगाने की व्यवस्था को स्पष्ट करती है।
अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये के UPI लेनदेन
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में UPI के जरिए करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये के 24,500 से अधिक लेनदेन किए गए। ये आंकड़े देश में डिजिटल भुगतान के बड़े स्तर को दिखाते हैं। (Source: ANI)
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