महंगे कच्चे तेल से बढ़ेगी आम आदमी की चिंता, तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर भारी घाटा
नई दिल्ली: जेफरीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप में गैस स्टोरेज का लेवल कम होने की वजह से ग्लोबल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतें सर्दियों में भी ऊंची रहने की उम्मीद है, जिससे भारत के घरेलू मार्केट में इसकी कीमत को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्पॉट LNG की कीमतें हफ्ते-दर-हफ्ते 6 परसेंट बढ़कर औसतन USD 32 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (mmBtu) हो गई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरोपियन यूनियन (EU) का गैस स्टोरेज लेवल अभी 75 परसेंट है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 83 परसेंट था, जो सर्दियों के मौसम से पहले सप्लाई की मुश्किल स्थिति का संकेत देता है।
मिडिल ईस्ट में तनाव से बढ़ सकती हैं गैस की कीमतें
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा कीमतों पर घरेलू कीमत पर दबाव है। इसलिए, हमें उम्मीद है कि सर्दियों में गैस की कीमतें ऊंची रहेंगी। रिपोर्ट में मिडिल ईस्ट के तेल एक्सपोर्ट में रिकवरी के बावजूद ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट में लगातार रुकावटों पर रोशनी डाली गई है। जेफरीज के मुताबिक, ईरान को छोड़कर मिडिल ईस्ट से क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट, युद्ध से पहले के लेवल के 90 परसेंट से ज़्यादा हो गया है। हालांकि, इस इलाके में नए हमलों के बीच पिछले हफ्ते फिजिकल क्रूड प्रीमियम हफ्ते-दर-हफ्ते 8 परसेंट बढ़कर USD 9 प्रति बैरल हो गया। साथ ही, ट्रांज़िट में क्रूड ऑयल अब तक के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया है, क्योंकि शिप-टू-शिप ट्रांसफर की वजह से तेल टैंकरों पर ज़्यादा देर तक रह रहा है और इंपोर्टर ME से दूर जाने के लिए लंबे रास्ते चुन रहे हैं। इन रुकावटों की वजह से शिपिंग कॉस्ट भी बढ़ी हुई है। फ्रेट रेट लड़ाई की शुरुआत में दर्ज लेवल से लगभग आठ गुना ज़्यादा बने हुए हैं, जबकि हफ्ते-दर-हफ्ते 3 परसेंट की गिरावट आई है।
पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर नुकसान
फ्रेट कॉस्ट अब क्रूड ऑयल की लैंडेड कॉस्ट का 25 परसेंट से ज़्यादा है, जबकि लड़ाई से पहले यह सिर्फ 3 परसेंट था। रिपोर्ट में कहा गया है, ऑयल टैंकरों पर कई हमलों की वजह से फ्रेट रेट जल्द ही ऊंचे रह सकते हैं। भारत के लिए क्रूड ऑयल की बढ़ी हुई कीमतें और रूसी तेल पर कम होते डिस्काउंट ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर फाइनेंशियल दबाव बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि रशियन क्रूड पर डिस्काउंट काफी कम हो गए हैं। रशियन यूराल ब्रेंट के मुकाबले USD 2 प्रति बैरल के डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है, जबकि फरवरी के आखिर में यह USD 14 प्रति बैरल था। इस बीच ब्रेंट के मुकाबले दुबई क्रूड पर डिस्काउंट हर हफ्ते छह गुना बढ़कर USD 4 प्रति बैरल हो गया। इस बैकग्राउंड में इंडियन OMCs के लिए क्रूड प्रोक्योरमेंट कॉस्ट मोटे तौर पर इंडियन क्रूड बास्केट की USD 118 प्रति बैरल की कीमत के बराबर ही है, जिससे पेट्रोल और डीज़ल पर काफी मार्केटिंग लॉस हो रहा है।
पेट्रोल-डीजल पर OMCs को भारी नुकसान
जेफरीज ने कहा, OMCs के लिए प्रोक्योरमेंट कॉस्ट इंडियन क्रूड बास्केट की US$118/bbl की कीमत के बराबर है, जिससे भारी लॉस हो रहा है। उन्होंने आगे कहा, 15-दिन की एवरेज प्राइसिंग के आधार पर पेट्रोल/डीज़ल का मौजूदा लॉस Rs25/37 प्रति lt है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर यूक्रेन के हमलों ने रूसी एक्सपोर्ट को कम कर दिया है, जिससे मिडिल डिस्टिलेट्स मार्केट में दिक्कत आ रही है। इसलिए, सप्लाई चेन के नॉर्मल होने में समय लग सकता है, जिससे FY27 में मार्जिन बढ़ने में मदद मिलेगी। इस बीच मिडिल ईस्ट में पेट्रोकेमिकल सप्लाई में रुकावटों ने ज़्यादा मार्जिन को सपोर्ट किया है।
रिलायंस के O2C प्रॉफिट को मिल सकता है फायदा
ईरान और सऊदी अरब में दो-दो बड़ी फैसिलिटी को नुकसान हुआ है। मिडिल ईस्ट से नॉर्थईस्ट एशिया में नैफ्था शिपमेंट पर भी असर पड़ा है। नतीजतन, पॉलीइथाइलीन (PE), पॉलीप्रोपाइलीन (PP) और पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (PET) में एवरेज पेट्रोकेमिकल मार्जिन फरवरी के आखिर के लेवल की तुलना में 55 परसेंट बढ़ गया है। जेफरीज के अनुसार, एवरेज पेट्रोकेमिकल मार्जिन (PE/PP/PET) अभी फरवरी के आखिर के मुकाबले 55% ज़्यादा हैं, जिससे रिलायंस के O2C प्रॉफिट में मदद मिल रही है।
(इनपुट: ANI)
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