पूर्व नेवी अधिकारी रंजीत राय ने ऑपरेशन सिंदूर को प

ऑपरेशन सिंदूर पर पूर्व नेवी अधिकारी रंजीत राय का बयान, बोले- पूरी तरह सफल रहा

Operation Sindoor: Ex-Navy Officer Ranjit Rai Says It Was Fully Successful

नई दिल्ली (भारत)। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व नेवी अधिकारी कमोडोर रंजीत राय (रिटायर्ड) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान की किराना हिल्स से जुड़ी हालिया टिप्पणियों का समर्थन करते हुए कहा कि उनके बयान से साफ़ होता है कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह सफल रहा। राय ने खास तौर पर ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किए गए ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ और किराना हिल्स के पास हुई घटनाओं को लेकर चौहान के बयान को अहम बताया है।

87 घंटे चले ऑपरेशन और लोइटरिंग म्यूनिशन का जिक्र

बात करते हुए पूर्व नेवी अधिकारी कमोडोर रंजीत राय ने कहा, "उन्होंने बिल्कुल साफ कर दिया कि यह (ऑपरेशन सिंदूर) पूरी तरह सफल रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 87 घंटे चले इस ऑपरेशन पर पूरी दुनिया की नजर है और लोग इसके बारे में जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान 'लोइटरिंग म्यूनिशन' का इस्तेमाल किया गया, जो असल में ड्रोन होते हैं। 

वे सरगोधा से 10 मील दूर मंडरा रहे थे। वे सरगोधा की ओर गए थे, लेकिन सरगोधा से 10 मील दूर किराना हिल्स है। पाकिस्तान ने किराना हिल्स पर कुछ अहम न्यूक्लियर टेस्ट किए हैं। किराना में जमीन के नीचे उनकी कुछ न्यूक्लियर फैसिलिटीज हैं। मेरा मतलब है, यह एक क्रांति है, जो दुनिया को ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बता रही है।"

किराना हिल्स की न्यूक्लियर फैसिलिटीज का उल्लेख

रंजीत राय, पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में सरगोधा और उसके आस-पास रडार का पता लगाने के लिए तैनात किया गया एक 'लोइटरिंग म्यूनिशन' अपना तय टारगेट न ढूंढ पाने के बाद किराना हिल्स के किसी इलाके से टकराया होगा।

विवेकानंद सेंटर में जनरल चौहान ने क्या कहा

नई दिल्ली में विवेकानंद सेंटर में बोलते हुए अनिल चौहान ने कहा, "किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और वहाँ पाकिस्तान की न्यूक्लियर फैसिलिटीज मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि सरगोधा की ओर भेजे गए 'लोइटरिंग म्यूनिशन' का उड़ान समय लगभग दो घंटे था और अगर वे टारगेट का पता लगाने में नाकाम रहते, तो आखिरकार नीचे गिरकर किसी इलाके से टकरा जाते।

टारगेट नहीं मिलने पर पहाड़ियों से टकराने की संभावना

जनरल चौहान ने कहा था, "मुझे लगता है कि मुझे यह साफ कर देना चाहिए कई बार यह पूछा गया है कि क्या किराना हिल्स पर हमला हुआ था या नहीं, जहाँ उनकी (पाकिस्तान की) न्यूक्लियर फैसिलिटीज हैं उन हमलों से पहले, हमने सरगोधा में बहुत सारे 'लोइटरिंग एम्युनिशन' भेजे थे और किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में है। 

तो लोइटरिंग एम्युनिशन उन राडार को ढूंढ रहा था जो सरगोधा और उसके आस-पास थे, और इसकी एक लाइफटाइम होती है, जिसका मतलब है कि यह लगभग दो घंटे तक हवा में घूमता रहता है और जब इसे कोई टारगेट नहीं मिलता, तो यह नीचे आकर कहीं टकरा जाता है।" 

किराना हिल्स से धुआं निकलता दिखा

उन्होंने आगे कहा, "हो सकता है कि यह उन पहाड़ियों में से किसी एक से टकरा गया हो। तो शायद यही एक वजह हो सकती है कि लोगों ने ऐसा पूछा, क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया ने कुछ ऐसी तस्वीरें भी दिखाई थीं जिनमें किराना हिल्स से धुआं निकलता दिख रहा था।" (Source: ANI)

यह भी पढ़ें:   माउंट आबू नक्की झील फायरिंग केस का खुलासा, मुख्य आरोपी राहुल गाजियाबाद से गिरफ्तार