मनरेगा का नाम बलने के प्रस्ताव पर भड़का विपक्ष, बताया दोबारा इतिहास लिखने की साजिश
नई दिल्ली। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना कानून (मनरेगा) का नाम बदलकर पुज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना करने के प्रस्ताव का विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार दोबारा इतिहास लिखने और महात्मा गांधी की विरासत को खोखला करने की कोशिश कर रही है।
भारत सरकार पर देश की इतिहास बदलने का आरोप
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा है कि इस कदम के व्यापक निहितार्थ है। भारत सरकार पूरा इतिहास बदल रही है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि स्थापित प्रतीकों और नरेटिव्स को बदलने का सुनियोजित प्रयास कर रही है। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त की। उन्होंने मनरेगा का नाम बदलने को दुर्भाग्यपूर्ण और राजनीति प्रेरित बताया। इससे प्रतीत होता है कि वे महात्मा गांधी के नाम से घृणा करते है।
योजना का नाम नहीं, उसकी भावना बदलने की कोशिश: भाजपा
इसके जवाब में भाजपा ने कहा कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला, इसका नाम बदलने के लिए नहीं, बल्कि इसकी भावना को बदलने के लिए है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने पर कांग्रेस की आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल और उसके नेता इस फैसले को समझ नहीं सकते क्योंकि वे विशेषाधिकार की भावना से काम करते हैं। भाजपा नेता त्रिवेदी ने परोक्ष तौर पर महात्मा गांधी के नाम की ओर इशारा करते हुए कहा, 'जिस नाम पर कांग्रेस अपना विशेष अधिकार मानती है, वह पूरे देश का है।'
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