दिल्ली में INDIA ब्लॉक ने चुनावी धांधली और संवैधान

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पाबंदी के खिलाफ सड़कों पर उतरा विपक्ष, INDIA ब्लॉक का बड़ा हंगामा

Protesters gather at Barakhamba Road

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। चुनाव में कथित धांधली और संवैधानिक संस्थाओं के कमजोर करने के गंभीर आरोपों के बीच 'INDIA' गठबंधन के शीर्ष नेता सड़कों पर उतर आए हैं। केंद्र सरकार के खिलाफ एक हाई-वोल्टेज और आक्रामक विरोध मार्च की शुरुआत कर दी गई है।

राजधानी में हाई अलर्ट और 'तानाशाही' के खिलाफ हुंकार

राष्ट्रीय राजधानी का माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है और सुरक्षा बल हाई अलर्ट मोड पर हैं। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि यह एक लंबे और एकजुट राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य उस व्यवस्था को चुनौती देना है जिसे विपक्षी दल 'तानाशाही' करार दे रहे हैं।

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने आंदोलन की रणनीतिक रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि इस एकजुटता का सीधा आह्वान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) की ओर से आया था। उन्होंने कहा, "हम आंदोलन शुरू करने के लिए लोगों को इकट्ठा कर रहे हैं। राहुल गांधी ने सभी को एकजुट होकर चलने के लिए बुलाया था।"

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भी इस गठबंधन की अटूट एकता पर मुहर लगाते हुए कहा, "राहुल गांधी जो भी करते हैं, हम उनके साथ हैं।"

संवैधानिक संस्थाओं के पक्षपाती रवैये पर आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने देश की संवैधानिक संस्थाओं के कथित पक्षपाती और दबाव में काम करने के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कांग्रेस सांसद गड्डम वामसी कृष्णा ने आरोप लगाया कि इन संस्थाओं के माध्यम से न्याय का हर रास्ता बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम सभी संवैधानिक संस्थाओं तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे संविधान का पक्ष नहीं ले रही हैं और न ही उसकी रक्षा कर रही हैं।"

समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने इस संघर्ष को तात्कालिक राजनीतिक फायदों से ऊपर उठकर एक दीर्घकालिक वैचारिक लड़ाई बताया। उन्होंने जोर देकर कहा, "यह जनता की लड़ाई है और यह लगातार जारी रहेगी।"

गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला

कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने केंद्र सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने के लिए दिल्ली पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

वडिंग ने दोटूक कहा, "पीएम मोदी और पुलिस अपनी ताकत का खुला दिखावा कर रहे हैं। हमारे लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है। दिल्ली पुलिस अमित शाह के आदेशों पर अपनी ताकत दिखा रही है। अगर हम ज्ञानेश कुमार से मिलना चाहते हैं, तो हमें इसकी अनुमति क्यों नहीं दी जा रही? सरकार उन्हें क्यों बचा रही है? क्योंकि वह उनके इशारे पर काम कर रहे हैं। आम जनता को अब यह साफ महसूस होने लगा है कि देश के साथ गंभीर धोखा हो रहा है।"

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने मार्च के मूल वैचारिक उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा, "लोकतंत्र में जनता सबसे ऊपर होती है और हम उसी जनता के अधिकारों और संविधान को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं।"

इस बीच, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने आगामी रणनीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विपक्ष अपने अगले कदमों पर विचार कर रहा है। रॉय ने बताया, "अभी यह अंतिम रूप से तय होना बाकी है कि हमारा मार्च किस रूट पर होगा, लेकिन सभी नेता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जुट रहे हैं। हमने देखा कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने क्या सुना है, अब उसी आधार पर हम आगे की रणनीति तय करेंगे।"

जंतर-मंतर पर पाबंदी और प्रशासनिक फेरबदल

विपक्ष का यह विशाल प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब मध्य दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल 'जंतर-मंतर' को विरोध प्रदर्शनों के लिए आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित कर दिया गया है।

एक आधिकारिक नोटिस के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है। नागरिकों के प्रदर्शन के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने तीन वैकल्पिक स्थान तय किए हैं:

  • रामलीला मैदान
  • बुराड़ी मैदान
  • पूर्वी दिल्ली का सीबीडी (CBD) ग्राउंड

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने जानकारी दी है कि इन नए वैकल्पिक स्थलों पर रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के संचालन के लिए एक विस्तृत और संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अलग से जारी किया जाएगा। यह नया आदेश 28 अप्रैल 2022 को जारी किए गए पिछले स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक संशोधन करता है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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