जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले सीजेपी कार्यकर्ताओ

तिरंगा थामने पर कार्रवाई: जंतर-मंतर पर गिरफ्तारी को लेकर केंद्र पर विपक्ष का तीखा हमला

CJP's Ashutosh Ranka at Jantar Mantar on Tuesday

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन करने वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के कार्यकर्ताओं—सौरव दास और आशुतोष रंका—की न्यायिक हिरासत को लेकर बुधवार को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। नेताओं ने सवाल खड़े किए कि क्या अपने ही देश में तिरंगा फहराना या हाथ में रखना अपराध की श्रेणी में आता है।

"क्या अपने देश में झंडा लहराना अपराध है?"

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस पुलिसिया कार्रवाई को आड़े हाथों लिया। अरविंद केजरीवाल ने कहा, "क्या अपने ही देश में अपना झंडा लहराना अपराध है? यह बिल्कुल हास्यास्पद है।"

डीएमके और शिवसेना (UBT) का कड़ा विरोध

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को जेल सलाखों के पीछे भेजने से जनता का आक्रोश और अधिक भड़केगा। इसके साथ ही उन्होंने गिरफ्तार किए गए युवाओं को हरसंभव कानूनी सहायता मुहैया कराने का ऐलान किया।

एम.के. स्टालिन ने 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "यह सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले सकती है? बीजेपी कितने युवा स्वरों को दबा सकती है? वे जितने ज्यादा युवाओं को जेल भेजेंगे, उतने ही ज्यादा आम नागरिक—जिनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है—सड़कों पर उतरेंगे और उन्हें जनता की असली ताकत दिखाएंगे!"

अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए स्टालिन ने आगे कहा, "आशुतोष रंका और सौरव दास के साथ पूरी एकजुटता है! डीएमके उन्हें हर जरूरी कानूनी प्रतिनिधित्व और समर्थन देने के लिए तैयार है।"

शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस घटनाक्रम को लोकतंत्र पर सीधा प्रहार बताया। उन्होंने घोषणा की कि 'सत्ताधारी व्यवस्था' और 'देशभक्त युवाओं' के बीच यह वैचारिक व राजनीतिक संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक लोकतांत्रिक मूल्यों को बहाल नहीं कर लिया जाता।

आदित्य ठाकरे ने 'एक्स' पर लिखा, "सरकार ने जंतर-मंतर पर तिरंगा थामने के लिए सौरव दास और आशुतोष रंका को जेल में डाल दिया है! कब से युवा भारतीयों का अपने ही देश में अपना राष्ट्रीय ध्वज थामना अपराध हो गया? सरकार बनाम देशभक्त युवा भारतीयों की यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक हम इस तानाशाही से लोकतंत्र को वापस नहीं पा लेते!"

राहुल गांधी की कड़ी प्रतिक्रिया

विपक्ष की इस मुखर मुखरता की शुरुआत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस कड़े बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत को सीधे तौर पर 'कायरतापूर्ण कृत्य' करार दिया था।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, "जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरतापूर्ण काम है। छात्र। युवा। पत्रकार। INDIA गठबंधन। अलग-अलग बैनर, एक मकसद। सभी विरोध प्रदर्शन एक ही हैं: नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।"

जंतर-मंतर के ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व पर जोर देते हुए कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस हासिल करेंगे।"

पृष्ठभूमि और वर्तमान अपडेट

उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रंका को जंतर-मंतर के पास एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पार्टी के सदस्य अजिंक्य शिंदे ने बुधवार को घटना की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि कार्यकर्ता इस तरह के दमनकारी कदमों से बिल्कुल भी डरने वाले नहीं हैं और उनका संघर्ष जारी रहेगा। ​(इनपुट: ANI)

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