असदुद्दीन ओवैसी ने RSS और BJP पर संविधान के बजाय म

ओवैसी का RSS-BJP पर तीखा हमला, मनुस्मृति को लेकर उठाए सवाल

Owaisi Attacks RSS-BJP Over Manusmriti, Questions Ideology

हैदराबाद (तेलंगाना)। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मनुस्मृति को लेकर RSS और BJP पर जोरदार हमला बोला है। हैदराबाद में ईद मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने आरोप लगाया कि RSS ने भारतीय संविधान को स्वीकार करने के बजाय ऐतिहासिक रूप से मनुस्मृति को प्राथमिकता दी। उन्होंने सावरकर और स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम नेताओं की भूमिका का जिक्र करते हुए BJP और RSS की विचारधारा पर भी सवाल उठाए।

ओवैसी ने RSS और BJP किया तीखा हमला

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ऐतिहासिक रूप से भारतीय संविधान के बजाय 'मनुस्मृति' को प्राथमिकता दी है। 1501वीं ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर दारुस्सलाम में 'जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन' को संबोधित करते हुए, हैदराबाद के सांसद ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज़ (संविधान) के प्रति RSS की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।

ओवैसी ने RSS से जुड़े लोगों से मनुस्मृति के बारे में पूछा

ओवैसी ने कहा, "मैं RSS से जुड़े लोगों से मनुस्मृति के बारे में पूछ रहा हूं। क्या यह सच नहीं है कि 26 नवंबर, 1949 को हमने संविधान अपनाया था? फिर भी, चार दिन बाद, 30 नवंबर को RSS के एक मुखपत्र ने इसके खिलाफ शिकायत प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि यह कोई संविधान नहीं है और इसकी जगह मनुस्मृति होनी चाहिए थी। उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान से दिक्कत थी।"

AIMIM प्रमुख ने सावरकर और मनुस्मृति पे भी की टिप्पणी

AIMIM प्रमुख ने हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर पर भी निशाना साधा और अंडमान सेलुलर जेल में उनके कार्यों की तुलना मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के कार्यों से की। उन्होंने कहा, "सावरकर मनुस्मृति के समर्थक थे। जब वे अंडमान जेल में थे, तो वे अंग्रेजों को पत्र लिखकर कह रहे थे, 'मैं आपके साथ हूं, कृपया मुझे रिहा कर दें।' लेकिन हम क्या कर रहे थे? अल्लामा फज़ल-ए-हक खैराबादी भी जेल में थे। उन्होंने कठिनाइयां झेलीं लेकिन अंग्रेजों को कभी कोई 'प्रेम पत्र' नहीं लिखा। इसके बजाय, उन्होंने उनके खिलाफ जिहाद का फतवा जारी किया। आज भी अंडमान में उनकी कब्र इस बात का सबूत है।"

मौलवी अलाउद्दीन को लेकर ओवैसी का दावा

ओवैसी ने दावा किया कि अंडमान द्वीप समूह भेजे गए पहले कैदी हैदराबाद के एक मौलवी थे। ओवैसी ने सभा में कहा, "सुनिए BJP और RSS के लोगों, अंडमान में पहला कैदी कौन था? वह आपके पिता, दादा या पूर्वज नहीं थे। वह हैदराबाद के मौलवी अलाउद्दीन थे, जो मक्का मस्जिद के इमाम थे। वही पहले कैदी थे।" AIMIM अध्यक्ष की यह टिप्पणी BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान के बीच आई है। (Source: ANI)

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