ईडी ने परिचम (Parimatch) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में

Parimatch Money Laundering Case: ED की 12 ठिकानों पर छापेमारी, ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

Representative image (File photo)

नई दिल्ली। साइप्रस स्थित अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म Parimatch से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को महाराष्ट्र, दिल्ली-NCR, राजस्थान और गुजरात में 12 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के मुताबिक, जांच में फर्जी कारोबारी लेनदेन, म्यूल अकाउंट, पेमेंट इंटरमीडियरी और हवाला चैनलों के जरिए रकम की परतें बनाने का खुलासा हुआ है। मामले में ED अब तक ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज कर चुकी है। इससे पहले 26 मई को हुई कार्रवाई में करीब ₹1.56 करोड़ की चल संपत्तियां जब्त की गई थीं, जिनमें लगभग ₹1.20 करोड़ नकद शामिल थे।

12 ठिकानों पर ED की कार्रवाई

अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार सुबह शुरू हुई कार्रवाई में महाराष्ट्र में पांच, दिल्ली-NCR में चार, राजस्थान में दो और गुजरात में एक ठिकाने को शामिल किया गया। तलाशी उन पेमेंट कंपनियों से जुड़े परिसरों पर भी की गई, जिनके बारे में आरोप है कि उन्होंने Cash Management System (CMS) एजेंटों के जरिए बेटिंग से हासिल रकम को नकदी में बदलने में भूमिका निभाई।

इसके अलावा ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और कंपनी सेक्रेटरी (CS) भी जांच के दायरे में हैं, जिन पर रकम को अवैध रेमिटेंस और कथित फर्जी Overseas Direct Investment (ODI) निवेश के जरिये देश से बाहर भेजने में मदद करने का आरोप है। ED ने उन पेमेंट गेटवे से जुड़े परिसरों को भी खंगाला, जिनके जरिए Parimatch की ओर से यूजर को भुगतान और पेआउट संभाले जाने की बात सामने आई है।

PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी

यह कार्रवाई ED के मुंबई जोनल ऑफिस की ओर से Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की जा रही है। इस धारा के तहत अधिकृत अधिकारियों को तलाशी और जब्ती की कार्रवाई करने की शक्ति मिलती है, जब उनके पास दस्तावेजी आधार पर यह मानने का कारण हो कि कोई व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है या उसके पास अपराध से अर्जित रकम यानी proceeds of crime मौजूद है। इसी प्रावधान के तहत मामले से जुड़े संदिग्धों के परिसरों की तलाशी ली जा रही है।

26 मई को भी 17 ठिकानों पर पड़ा था छापा

इस मामले में ED ने इससे पहले 26 मई को महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, दमन और उत्तर प्रदेश में 17 ठिकानों पर PMLA के तहत तलाशी अभियान चलाया था। उस कार्रवाई में करीब ₹1.56 करोड़ की चल संपत्तियां जब्त की गई थीं। इनमें लगभग ₹1.20 करोड़ नकद थे। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब ₹3.80 करोड़ की रकम फ्रीज की गई थी। तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी मिले थे, जिन्हें ED ने जब्त किया था।

₹3,000 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन की जांच

ED ने मुंबई साइबर पुलिस स्टेशन में Parimatch.com के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। FIR में ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिये यूजर्स को कथित तौर पर ठगने का आरोप लगाया गया था। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, प्लेटफॉर्म ने निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर रकम जुटाई और एक साल में ₹3,000 करोड़ से अधिक का कारोबार/फंड फ्लो जनरेट किया।

ED की अब तक की जांच में प्लेटफॉर्म और उसके सहयोगियों की ओर से रकम जुटाने, उसकी परतें बनाने और उसे ट्रांसफर करने के लिए एक जटिल वित्तीय नेटवर्क इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, "Parimatch और उसके सहयोगियों ने यूजर फंड की कलेक्शन, लेयरिंग और ट्रांसफर के लिए म्यूल अकाउंट, पेमेंट इंटरमीडियरी और फाइनेंशियल इन्क्लूजन चैनलों का जटिल नेटवर्क अपनाया।"

दूसरे यूजर्स के पैसों से होता था निकासी का भुगतान?

ED की पिछली जांच में एक खास तरीके का भी पता चला। एजेंसी के मुताबिक, कुछ मामलों में यूजर की निकासी के लिए प्लेटफॉर्म के नियंत्रण वाले बैंक खातों से सीधे रकम बाहर नहीं भेजी गई। इसके बजाय दूसरे यूजर्स की ओर से जमा की गई रकम को कई किस्तों में उस व्यक्ति के बैंक खाते या UPI-ID में भेजा गया, जिसने निकासी की मांग की थी।

ED ने पहले कहा था, "कुछ मामलों में यूजर की निकासी को प्लेटफॉर्म के नियंत्रण वाले खातों से सीधे भुगतान किए बिना प्रोसेस किया गया। इसके बजाय अन्य यूजर्स की जमा रकम को कई किस्तों में सीधे निकासी करने वाले यूजर के बैंक खाते या UPI-ID में भेजा गया।" एजेंसी के मुताबिक, इस तरीके का मकसद वास्तविक मनी ट्रेल को छिपाना और प्लेटफॉर्म से सीधे भुगतान का संबंध समाप्त करना था।

Software और Fintech कंपनियों के खातों का कथित इस्तेमाल

जांच में कई ऐसे करंट अकाउंट भी सामने आए जो Software, Fintech और Technology से जुड़ी कंपनियों के नाम पर खोले गए थे। इन कंपनियों की वास्तविक कारोबारी गतिविधियां भी थीं। हालांकि ED का आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल यूजर डिपॉजिट हासिल करने और पेआउट भेजने के लिए किया गया।

इन लेनदेन को कथित तौर पर vendor payments, सामान्य कारोबारी ट्रांजैक्शन और payment gateway services के रूप में दिखाया जाता था। ED के मुताबिक, "यूजर डिपॉजिट और निकासी को Software, Fintech और Technology से जुड़ी संस्थाओं के नाम पर खोले गए कई करंट अकाउंट के जरिए रूट किया गया, जो वास्तविक कारोबारी गतिविधियों में भी शामिल थीं।"

BC नेटवर्क से लेकर किराना दुकानों तक का इस्तेमाल

पिछली तलाशी में ED को यह भी पता चला था कि Parimatch से जुड़े पेआउट और रकम की आवाजाही के लिए Banking Correspondent (BC) नेटवर्क, मोबाइल मनी ट्रांसफर एजेंट, ग्राहक सेवा केंद्र (Grahak Seva Kendra), Cash Management Services (CMS), स्थानीय किराना दुकानों और रिटेल आउटलेट्स का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।

एजेंसी के मुताबिक, यूजर फंड को पहले retailers और Grahak Seva Kendras तक पहुंचाया जाता था, जो Business Correspondent (BC) नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे। ED ने बताया कि "एक लेयर्ड मैकेनिज्म के तहत यूजर फंड को Business Correspondent (BC) नेटवर्क के अंतर्गत काम करने वाले retailers और Grahak Seva Kendras के जरिए रूट किया गया।"

कैसे छिपाया जाता था रकम का असली स्रोत?

जांच एजेंसी के मुताबिक, रकम पहले retailers को ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद retailer उसे BC तक पहुंचाता था और BC उन retailers के wallets को recharge करता था। Wallet में रकम आने के बाद retailers उसका इस्तेमाल Parimatch प्लेटफॉर्म के यूजर्स को पेआउट करने के लिए करते थे। ED के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया से रकम के वास्तविक स्रोत और उसके ट्रेल को छिपाने में मदद मिलती थी।

कुछ एजेंटों पर आरोप है कि उन्होंने CMS चैनलों के जरिये मिली नकदी को डायवर्ट किया और उसे Parimatch यूजर्स के डिपॉजिट से हासिल RTGS ट्रांसफर के साथ समायोजित किया। इससे कथित तौर पर रकम के वास्तविक स्रोत और उसके वित्तीय ट्रेल को अलग रूप में पेश किया गया।

नकदी से हवाला चैनल तक पहुंची रकम

ED के मुताबिक, CMS चैनलों से हासिल ऐसी नकदी को बाद में हवाला चैनलों के जरिए भारत से बाहर ट्रांसफर किया गया। यानी जांच में जिस कथित नेटवर्क की तस्वीर सामने आई है, उसमें डिजिटल पेमेंट, बैंक खाते, रिटेल नेटवर्क और नकद प्रबंधन चैनलों के साथ-साथ देश के बाहर रकम भेजने के लिए अवैध हवाला तंत्र का इस्तेमाल शामिल है।

'Parimatch Sports' और 'Parimatch News' के नाम पर विज्ञापन

ED की जांच सिर्फ फंड फ्लो तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने यह भी कहा है कि Parimatch ने अपने बेटिंग प्लेटफॉर्म के प्रचार के लिए 'Parimatch Sports' और 'Parimatch News' जैसे नामों से surrogate advertisements का सहारा लिया। ED के अनुसार, अन्य बेटिंग वेबसाइटों की तुलना में प्लेटफॉर्म ने hyperlocal marketing पर ज्यादा जोर दिया। एजेंसी ने कहा कि Parimatch ने भारत के 15 से अधिक राज्यों में स्थानीय क्रिकेट लीग की टीमों को प्रायोजित किया। इसके अलावा हॉकी और फुटबॉल टूर्नामेंट में भी प्रचार गतिविधियां की गईं।

Quick-commerce ऐप्स के जरिए भी यूजर्स तक पहुंच

जांच में यह भी सामने आया कि बेटिंग से जुड़े विज्ञापनों को प्रमुख quick-commerce applications के जरिए प्रमोट किया गया। ED के मुताबिक, नए यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए grocery deliveries के साथ promotional material भी भेजा गया। एजेंसी ने कहा, "ऐसे विज्ञापनों को रणनीतिक रूप से ऐप के इस्तेमाल और ऑर्डर प्लेसमेंट के दौरान प्रदर्शित किया गया, ताकि नए यूजर्स को प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित किया जा सके और उन्हें जोड़ा जा सके।"

अब तक ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

Parimatch मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। एजेंसी के मुताबिक, अब तक इस केस में ₹112 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है। बुधवार की नई तलाशी का फोकस कथित तौर पर उस वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क पर है, जिसके जरिये बेटिंग से जुड़े फंड को नकदी, बैंकिंग चैनलों, पेमेंट गेटवे, कारोबारी खातों, ODI निवेश और हवाला नेटवर्क के जरिए घुमाने का आरोप है।

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