अंकिता भंडारी हत्याकांड: पवन खेड़ा ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग
नई दिल्ली। सिक्किम के राज्यपाल के रूप में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति का कड़ा विरोध करते हुए, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बुधवार को 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में भाजपा के रवैये की कड़ी आलोचना की। एएनआई से बात करते हुए पवन खेड़ा ने कहा, “आपने उन्हें छूट दे दी है। आप सीबीआई जांच का इंतजार भी नहीं कर रहे हैं। इतनी जल्दी मामले को निपटाने का इतना दबाव क्यों है? आप किसे बचा रहे हैं? सब कुछ दांव पर क्यों लगा रहे हैं? आप चुनाव को लेकर बेपरवाह दिखते हैं; आपको कोई डर नहीं है। सरकार ने डर का नामोनिशान खो दिया है।”
दिवंगत अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात
उन्होंने आगे कहा, “जब शासन और शासक डर खो देता है, तो जनता पीड़ित होती है और पीड़ा में चीखती है। आज हम जो आक्रोश देख रहे हैं, वह ठीक इसी वजह से है कि शासक को अब किसी चीज का डर नहीं है। यह बेहद दुखद है। न्याय एक दूर का सपना है। जिन लोगों को न्याय दिलाना चाहिए, वे पीड़ित के साथ नहीं खड़े हैं। उन्होंने आरोपी का साथ दिया है।” इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को नई दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दे रही दिवंगत अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की।
दुष्यंत गौतम की संवैधानिक नियुक्ति को तत्काल रोकने की मांग
शोक संतप्त परिवार भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में हाल ही में हुई नियुक्ति के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। वे कथित संलिप्तता का हवाला देते हुए केंद्रीय जांच लंबित रहने तक उनकी संवैधानिक नियुक्ति को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं। सरकार के इस फैसले पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने इस राजनीतिक नियुक्ति के लिए कानूनी जवाबदेही की मांग की और कहा, "दुष्यंत कुमार को जेल में होना चाहिए। मैं माननीय राष्ट्रपति से विनम्र निवेदन करता हूं कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार को राज्यपाल नियुक्त न किया जाए।"
पुलकित आर्य और दो कर्मचारियों को आजीवन कारावास की सजा
उनकी हत्या 18 सितंबर, 2022 को हुई थी और उनका शव 24 सितंबर, 2022 को चिल्ला नहर से बरामद किया गया था। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (भाजपा से निष्कासित नेता विनोद आर्य के बेटे) और दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया, उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया और 30 मई, 2025 को कोटद्वार की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रीना नेगी ने हत्या, सबूत नष्ट करने और अन्य आरोपों में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
(इनपुट: ANI)
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