ईसी पर बढ़ा सियासी घमासान: पवन खेड़ा बोले, 'मुख्य चुनाव आयुक्त दें इस्तीफा, तभी लौटेगा जनता का विश्वास'
नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश का सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व मंत्री आरके सिंह के एक पत्र का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, कानूनों के कथित उल्लंघन और चुनावी शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पवन खेड़ा ने आरके सिंह के पत्र का हवाला दिया
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व गृह सचिव आरके सिंह के पत्र को साझा करते हुए निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला। खेड़ा ने कहा कि आरके सिंह व्यवस्था की अंदरूनी कार्यप्रणाली से भली-भांति वाकिफ हैं और उनका पत्र चुनावी प्रक्रिया की विसंगतियों को बेनकाब करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कवायद ने भारतीय चुनावों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है और जनविश्वास बहाल करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।
<blockquote lang="en" dir="ltr">Former Union Minister for Power and former Union Home Secretary Raj Kumar Singh - a former BJP leader who knows the system from the inside - has delivered a devastating indictment of the ECI’s SIR.<br><br>His warning goes far beyond the mechanics of electoral rolls. He has flagged:<br><br>•… <a href="https://t.co/Y6dV2THHPj">https://t.co/Y6dV2THHPj</a></p>— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) <a href="https://x.com/Pawankhera/status/2104788052006895784?ref_src=twsrc%5Etfw">September 29, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
SIR की कानूनी प्रक्रिया पर आरके सिंह के सवाल
आरके सिंह ने अपने खुले पत्र में गंभीर सवाल उठाते हुए लिखा कि "क्या आप चाहते हैं कि भारत एक लोकतंत्र बना रहे? तो आपको समझना होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके आका तथाकथित एसआईआर में क्या कर रहे हैं। वे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं।" सिंह के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 के तहत विशेष पुनरीक्षण केवल विशेष मामलों और लिखित कारणों के आधार पर किसी निर्वाचन क्षेत्र में होता है, लेकिन इसे पूरे देश में लागू करना गैरकानूनी है।
प्रक्रियात्मक खामियों से बाहर हुए गरीब मतदाता
पूर्व गृह सचिव ने प्रक्रियात्मक खामियों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 22 के तहत सिर्फ निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ही जांच और सुनवाई के बाद नाम हटा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नाम हटने पर लोगों को फॉर्म 6 के जरिए दोबारा आवेदन के लिए विवश किया गया और माता-पिता के 2003 के रिकॉर्ड मांगने से युवा मतदाताओं का पंजीकरण रुका। इसके अलावा तार्किक विसंगतियों के तकनीकी नियमों के चलते गरीब और वंचित वर्ग के लोग बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो गए।
<blockquote lang="en" dir="ltr">An open letter to all my countrymen.<br><br>Do you want India to remain a democracy? Then you must understand what Gyanesh Kumar, the CEC, and his bosses are doing in the so-called SIR.<br>They are violating the law.<br>- As per Section 21 of the law, a special revision is to be undertaken…</p>— R. K. Singh (@RajKSinghIndia) <a href="https://x.com/RajKSinghIndia/status/2104633647295001041?ref_src=twsrc%5Etfw">September 28, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
13 करोड़ नाम हटने के दावे पर बढ़ा विवाद
सिंह ने दावा किया कि एसआईआर के तहत अब तक 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं, जबकि 2024 के आम चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच केवल 3 प्रतिशत का अंतर था। ऐसे में इन कटौतियों का चुनावों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने विपक्षी दलों को एकजुट होकर मांग पूरी होने तक चुनाव न लड़ने की सलाह दी, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज की समिति द्वारा चुनाव आयुक्तों के चयन और मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग शामिल है।
जनसांख्यिकीय समिति पर जयराम रमेश का हमला
इस बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गृह मंत्रालय के अधीन जनसांख्यिकीय बदलावों पर बनी समिति को दुर्भावनापूर्ण एजेंडे से प्रेरित बताया। उधर एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार एसआईआर की प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक असंतोष की बातों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि एसआईआर से संबंधित सभी निर्णय आयोग की पूर्ण सर्वसम्मति से लिए गए हैं। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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