नई दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ़

Delhi NIA Court: पीएफआई संस्थापक ई. अबूबकर की जमानत अर्जी तीसरी बार खारिज

National investigation agency (File Photo)

नई दिल्ली। नई दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया' (PFI) के संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर की जमानत की तीसरी अर्ज़ी खारिज कर दी है। यह मामला 'गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत दर्ज किया गया था। कोर्ट ने हाल ही में PFI नेताओं जिनमें ई. अबूबकर और अन्य आरोपी शामिल हैं - के खिलाफ़ आतंकी साज़िश, आतंकी फंडिंग और देश के खिलाफ़ युद्ध छेड़ने की साज़िश से जुड़े आरोपों में आरोप तय किए थे।

स्वास्थ्य और ट्रायल में देरी का हवाला देकर मांगी थी राहत

साल 2022 में गिरफ्तार अबू बकर ने मुकदमे में देरी, अपनी स्वास्थ्य स्थिति, त्वरित सुनवाई और UAPA मामलों के तहत जमानत संबंधी कानूनी प्रावधानों में बदलाव का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। पटियाला हाउस कोर्ट के स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने बुधवार को आरोपी के वकील और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की दलीलें सुनने के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।

ट्रायल में देरी पर स्पेशल जज की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि देरी के पहलू को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। ट्रायल में देरी के पहलू को समझने के लिए इस मामले में मौजूद हालात को भी समझना ज़रूरी है। स्पेशल जज ने 15 जुलाई को कहा, "इन हालात में अपराध की गंभीरता, कोर्ट पर काम का बोझ, शामिल आरोपियों की संख्या, आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों की संख्या और इसी तरह की बातें शामिल हैं।"

ट्रायल में देरी के तर्क को अदालत ने माना बेबुनियाद

कोर्ट ने कहा कि आरोपी के वकील ने ट्रायल में देरी का मुद्दा उठाते हुए इन बातों का ज़िक्र नहीं किया। इसलिए, उनका तर्क निराधार है। स्पेशल जज ने कहा, "जिस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है, वहां मामले के लंबित होने, देरी की वजह और अन्य प्रशासनिक पहलुओं पर आरोपी के वकील ने कोई बात नहीं रखी। इसलिए, ट्रायल में देरी के आधार पर ज़मानत की मांग में कोई दम नहीं है। इसे खारिज किया जाता है।"

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट के सामने रखे पुख्ता सबूत

आरोपी के वकील ने जल्द सुनवाई, UAPA मामलों में जमानत से जुड़े कानून में बदलाव, आरोपी की सेहत और 22 सितंबर, 2022 को गिरफ्तारी के बाद से उसकी कस्टडी के आधार पर जमानत की मांग की। NIA की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) राहुल त्यागी ने जतिन खत्री और अमित रोहिला के साथ पेश होकर दलील दी कि अर्ज़ी खारिज कर दी जानी चाहिए। NIA के SPP ने दावा किया कि अर्जी देने वाले के खिलाफ सबूत हैं जो पहली नजर में उन अपराधों में उसकी भागीदारी दिखाते हैं जिनके लिए उस पर चार्जशीट दाखिल की गई है। ​(इनपुट: ANI)

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