प्रधानमंत्री मोदी ने आपातकाल को बताया संविधान पर हमला, लोकतंत्र की रक्षा करने वालों को दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली,(भारत)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय संविधान पर सीधा प्रहार बताया और इस दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी।
आपातकाल को बताया नागरिक अधिकारों के हनन
आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर साझा किए गए एक संदेश में उन्होंने आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (MISA) के तहत हुई गिरफ्तारियों और नागरिक अधिकारों के हनन को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि यह दौर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक अत्यंत कठिन अध्याय था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगी, कई राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव देखा गया।
संविधान के महत्व पर दिया जोर
उन्होंने यह भी उल्लेख किया, कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अनेक नागरिकों ने साहस दिखाते हुए संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा की और चुप रहने से इनकार कर दिया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में संविधान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई और ऐसे भारत के निर्माण की बात कही जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के सिद्धांतों पर लगातार आगे बढ़े।
आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए लगाया गया था आपातकाल
25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने “आंतरिक अशांति” का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल घोषित किया था। यह अवधि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक चली। इस दौरान इंदिरा गांधी सरकार की आलोचना मौलिक अधिकारों के निलंबन, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और कठोर कानूनों के उपयोग को लेकर हुई। जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं ने उस समय सरकार के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन का नेतृत्व किया था। (एएनआई)
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