पीएम मोदी की डिग्री मामले में दिल्ली HC में 29 सितंबर को होगी सुनवाई
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग वाली अपीलों पर सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की है। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा सुनवाई की तारीख पहले तय करने का अनुरोध किए जाने के बाद भी पीठ ने 29 सितंबर की तारीख पर ही सुनवाई करने का फैसला किया।
डिग्री रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के मामले में सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के मोदी की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के निर्देश को रद्द करने वाले एकल-न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। प्रारंभ में, अपीलकर्ताओं की ओर से सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया गया। मेहता ने कहा कि मामले की सुनवाई किसी अन्य दिन की जा सकती है और उन्होंने सुनवाई की तारीख पहले तय करने का अनुरोध किया। हालांकि, पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई 29 सितंबर को ही होगी।
सॉलिसिटर जनरल ने की तारीख पहले करने की मांग
सॉलिसिटर जनरल ने फिर से पूछा कि क्या सुनवाई की तारीख पहले दी जा सकती है, जिसके बाद पीठ ने कहा कि उसने अपना कैलेंडर देख लिया है। ये अपीलें आरटीआई कार्यकर्ता नीरज, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद ने दायर की हैं। यह मामला 25 अगस्त, 2025 को दिए गए एकल न्यायाधीश के फैसले से जुड़ा है, जिसमें मोदी की स्नातक डिग्री से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के निर्देश देने वाले सीआईसी के आदेश को रद्द कर दिया गया था। एकल न्यायाधीश ने कहा था कि किसी व्यक्ति के सार्वजनिक पद पर होने का यह अर्थ नहीं है कि उससे संबंधित सभी व्यक्तिगत जानकारी स्वतः ही सार्वजनिक हो जाती है। न्यायालय ने मांगी गई जानकारी में किसी भी "निहित जनहित" की संभावना को भी खारिज कर दिया था।
RTI कानून को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि सूचना का अधिकार अधिनियम सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, न कि "सनसनीखेज खबरों को बढ़ावा देने" के लिए। कार्यवाही नीरज द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन से शुरू हुई थी। आवेदन के आधार पर, सीआईसी ने 21 दिसंबर, 2016 को उन छात्रों के रिकॉर्ड के निरीक्षण की अनुमति दी थी जिन्होंने 1978 में बीए परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जिस वर्ष मोदी ने परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
दिल्ली विश्वविद्यालय समेत छह याचिकाओं पर फैसला
एकल न्यायाधीश ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा सीआईसी के निर्देश को चुनौती देने सहित छह याचिकाओं पर एक समान फैसला सुनाया था। दिल्ली विश्वविद्यालय ने सीआईसी के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए कहा था कि उसे संबंधित रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने में कोई आपत्ति नहीं है। एकल न्यायाधीश ने यह भी माना था कि सार्वजनिक पद धारण करने या आधिकारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए शैक्षणिक योग्यता कोई वैधानिक आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि किसी विशिष्ट सार्वजनिक पद के लिए पात्रता हेतु शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य शर्त के रूप में निर्धारित किया गया होता तो स्थिति भिन्न हो सकती थी। एकल न्यायाधीश ने सीआईसी के इस दृष्टिकोण को "पूरी तरह से भ्रामक" बताते हुए उसके निर्देश को रद्द कर दिया था।
29 सितंबर को डिवीजन बेंच में होगी सुनवाई
एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर आगे की सुनवाई के लिए यह मामला अब 29 सितंबर को डिवीजन बेंच के समक्ष आएगा।
(एएनआई)
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