'मन की बात' को पीएम मोदी ने बताया तीर्थयात्रा, पंजाब की पारंपरिक खेती और हेवल नदी के संरक्षण का किया जिक्र
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मासिक रेडियो प्रोग्राम के 139वें एपिसोड के दौरान कहा कि 'मन की बात' आम लोगों के योगदान को समझने और उनका जश्न मनाने का एक सफर है, जिसमें पंजाब में पारंपरिक खेती, बुनाई के ज़रिए महिलाओं का सशक्तिकरण और उत्तराखंड में नदी संरक्षण पर पहल को हाईलाइट किया गया है। 12 साल पहले विजयादशमी के मौके पर 'मन की बात' की शुरुआत को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रोग्राम बिना रुके चलता रहा, जिसमें सुनने वालों ने पूरे सफर में अहम भूमिका निभाई। PM मोदी ने कहा, "12 साल पहले विजयादशमी के पावन मौके पर हमने 'मन की बात' शुरू किया था। तब से हमारा सफर बिना रुके चलता रहा है। आप सभी इस सफर में साथी और गाइड दोनों रहे हैं। मेरे लिए 'मन की बात' हमारे देश के आम आदमी की कड़ी मेहनत, हिम्मत, कमिटमेंट, डेडिकेशन और सेवा की भावना का जश्न मनाने का एक शानदार मौका रहा है।"
पीएम मोदी ने 'मन की बात' को बताया तीर्थयात्रा
भारत की सदियों पुरानी तीर्थयात्राओं की परंपरा से तुलना करते हुए उन्होंने कहा, हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्राओं की परंपरा रही है। मेरे लिए, 'मन की बात' किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। देश के लोगों की कोशिशों को करीब से समझने और उनके योगदान को श्रद्धांजलि देने की एक यात्रा है। प्रोग्राम के दौरान प्रधानमंत्री ने 'नव-त्रिंजन' पहल के ज़रिए पंजाब के मालवा इलाके में खेती के पारंपरिक तरीकों को फिर से शुरू करने पर ज़ोर दिया। हमारे देश में कई पारंपरिक हुनर हैं जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं। खुशी की बात यह है कि ये परंपराएं अब नए एक्सपेरिमेंट को प्रेरित कर रही हैं। उन्हें आज की ज़रूरतों के हिसाब से बदला जा रहा है। ऐसी ही एक पहल पंजाब में काफी समय से चल रही है।
'नव-त्रिंजन' से ऑर्गेनिक कॉटन और बुनाई को बढ़ावा
'खेती विरासत मिशन' नाम के एक संगठन ने ऑर्गेनिक खेती और खेती के पारंपरिक तरीकों को फिर से शुरू करना शुरू किया। इसकी टीम के सदस्य पंजाब के मालवा इलाके में नेचुरल कॉटन की खेती को बढ़ावा देना चाहते थे। इस पहल का नाम 'नव-त्रिंजन' रखा गया। इस पहल के तहत बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक कॉटन उगाया जाता है। यहां नेचुरली रंगीन कॉटन भी उगाया जाता है। पारंपरिक बुनाई के हुनर को बचाने की कोशिशों पर ज़ोर देते हुए उन्होंने बताया कि 'नव-त्रिंजन' ने इस हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक बुनाई स्कूल भी शुरू किया है। उन्होंने आगे कहा, कुछ साल पहले, 'नव-त्रिंजन' ने भी एक बुनाई स्कूल शुरू किया था। इसका मकसद बुनाई का हुनर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है। इस स्कूल ने कई महिलाओं की ज़िंदगी बदल दी है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल इलाके में हेवल नदी को फिर से ज़िंदा करने के लिए समुदाय की पहल पर भी ज़ोर दिया।
बारिश का पानी बचाने और पौधारोपण से लौटे जलस्रोत
पीएम मोदी ने कहा, उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल इलाके में लोग एक नदी- 'हेवल' में नई जान डालने की कोशिश में एक साथ आए हैं। कुछ समय पहले हेवल नदी में पानी का लेवल कम होने लगा था और आस-पास के कुदरती पानी के सोर्स भी सूख रहे थे। इसके जवाब में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और गांव वालों ने मिलकर नदी को बचाने के लिए एक कैंपेन शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस कैंपेन में बारिश का पानी बचाना, ग्राउंडवाटर रिचार्ज और बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना शामिल था। उन्होंने आगे कहा, "इस पहल के दौरान बारिश का पानी इकट्ठा करने, ग्राउंडवाटर रिचार्ज को आसान बनाने और बड़ी संख्या में पेड़ लगाने के उपाय किए गए। आज इन कोशिशों की वजह से हेवल नदी फिर से ज़िंदा हो गई है। दर्जनों कुदरती पानी के सोर्स भी ठीक हो गए हैं। इस बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा और BJP के दूसरे नेता प्रोग्राम सुनने के लिए जुड़े हुए हैं।
(इनपुट: ANI)
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