'यह गीत स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक बना', वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में बोले PM मोदी
Parliament Winter Session : पीएम मोदी ने सोमवार को कहा, आज भी 15 अगस्त, 26 जनवरी, हर घर तिरंगा की बात आती है तो चारों तरफ देशभक्ति और वंदे मातरम् का भाव दिखता है. वंदे मातरम् केवल गीत या भाव गीत नहीं, ये प्रेरणा है. राष्ट्र के लिए झकझोरने वाला गान है. वे लोकसभा में 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ पर बोल रहे थे.
उन्होंने कहा कि पूज्य गांधी ने जो भाव प्रकट किया था, वो भाव आज भी मौजूद है. ये भाव आज भी हमें जोड़ता है. नेहरू जी कहते थे कि मैंने वंदे मातरम् गीत का बैकग्राउंड पढ़ा है. मुझे लगता है. जो बैकग्राउंड है, इससे मुस्लिम भड़केंगे. इसके बाद कांग्रेस की तरफ से बयान आया कि 26 अक्टूबर से कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक कोलकाता में होगी.
1937 में जिन्ना ने इसका विरोध किया, तब..
उन्होंने कहा कि जिसमें वंदे मातरम् के उपयोग की समीक्षा की जाएगी. 1937 में जिन्ना ने इसका विरोध किया. जवाहर लाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा, बजाय कि नेहरू जी मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों को तगड़ा जवाब देते, उल्टा उन्होंने वंदे मातरम् की ही पड़ताल शुरू कर दी. जिन्ना के विरोध के पांच दिनों के बाद ही 20 अक्टूबर को नेहरू जी ने नेता जी को चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में नेहरू जी जिन्ना की भावना से सहमति दिखाते नजर आए.
उन्होंने कहा कि लंदन के इंडिया हाउस में वीर सावरकर ने वंदे मातरम गीत गाया. वहां ये गीत बार-बार गूंजता था. वंदे मातरम् के नाम से अखबार निकाले गए. अंग्रेजों ने रोक लगा दी. भीकाजी कामा ने पेरिस में अखबार निकाला, उसका नाम भी वंदे मातरम् रखा. वंदे मातरम् ने भारत को स्वावलंबन का रास्ता भी दिखाया. वंदे मातरम् बोलने पर सजा के कानून लागू कर दिए गए थे. इस प्रतिबंध के विरोध में बारिसाल की एक वीरांगना सरोजनी बोष ने उस जमाने में कहा था कि वंदे मातरम् पर, जो प्रतिबंध लगा है, जब तक ये प्रतिबंध नहीं हटता है, मैं अपनी चूड़ियां निकाल दूंगी. भारत में वो एक जमाना था. चूड़ी निकालना, यानी महिला की जीवन की बड़ी घटना. उन्होंने सोने की चूड़ी हटा ली.
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