पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत मेधावी छात्रों को

पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना से 7 लाख छात्रों को मिलेगा शिक्षा ऋण लाभ, 10 लाख तक लोन पर 3% ब्याज सब्सिडी

सांकेतिक तस्वीर (AI-Generated)

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना देश के मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते में आने वाली वित्तीय बाधाओं को दूर करने में एक बड़ा संबल बनकर उभरी है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री द्वारा लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार, इस योजना के लिए एक समर्पित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल (https://pmvidyalaxmi.co.in) शुरू किया गया है, जो 25 फरवरी 2025 से क्रियाशील है। इसके तहत 2024-25 से 2030-31 की अवधि के दौरान 7 लाख तक नए छात्रों को लाभ देने के लिए 3,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वित्तीय सहायता और ब्याज सब्सिडी का पूरा गणित

केंद्र सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र को सिर्फ पैसों की कमी या वित्तीय बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न होना पड़े। जिन विद्यार्थियों को योग्यता के आधार पर शीर्ष संस्थानों (QHEI) में प्रवेश मिलता है, उन्हें बिना किसी थर्ड-पार्टी गारंटर या कोलैटरल के लोन दिया जाता है। जिन छात्रों की वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख रुपये तक है, उन्हें इस योजना के तहत 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3% की भारी-भरकम ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है। प्रत्येक वर्ष ऐसे 1 लाख तक नए छात्र जो किसी अन्य छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले रहे हैं, इस सुविधा के पात्र हैं।

सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान स्पष्ट किया कि केवल पात्र विद्यार्थियों तक ही लाभ पहुंचे, इसके लिए आधार आधारित डी-डुप्लीकेशन किया जाता है। मंजूरी मिलने के बाद छात्र को 'पीएम-विद्यालक्ष्मी डिजिटल रुपया ऐप' इंस्टॉल करने का संदेश मिलता है, जिसके डिजिटल वॉलेट से राशि डीबीटी के माध्यम से ऋण खाते में जाती है।

सीजीएफएसईएल योजना और क्रेडिट गारंटी कवरेज

पारंपरिक शिक्षा ऋणों को बढ़ावा देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 'पीएम उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन क्रेडिट गारंटी फंड योजना' (PM-USP CGFSEL) भी लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक के ऋण के लिए खुद गारंटी देती है। डिफ़ॉल्ट या भुगतान न होने की स्थिति में यह योजना ऋण राशि के 75% तक का गारंटी कवरेज प्रदान करती है। वर्ष 2015 से लेकर 21 जुलाई, 2026 तक, 59,843.74 करोड़ रुपये की कुल राशि के लिए 14,65,880 क्रेडिट गारंटी जारी की जा चुकी हैं, जिससे बैंकिंग प्रणाली में भी लोन देने का हौसला बढ़ा है।

शैक्षणिक प्रदर्शन और बैंकों की व्यापक भागीदारी

योजना का दूसरा अहम पहलू यह है कि छात्रों को मिलने वाली ब्याज सब्सिडी पूरी तरह से उनके संतोषजनक शैक्षणिक प्रदर्शन पर निर्भर करती है। इसके लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर क्यूएचईआई (QHEI) संस्थानों के माध्यम से छात्रों की सेमेस्टर-वार प्रगति रिपोर्ट अपलोड करने की डिजिटल व्यवस्था की गई है, जिससे निरंतर निगरानी रखी जा सके।

वर्तमान में इस मिशन से देश के तमाम बड़े बैंक जुड़ चुके हैं। पोर्टल पर 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, 20 निजी बैंक, 25 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और 7 सहकारिता बैंक शामिल हैं। इससे ग्रामीण, जनजातीय और देश के दूरदराज के वंचित क्षेत्रों के छात्रों के लिए भी ऋण लेना आसान हो गया है। सरकार के इन समन्वित प्रयासों के चलते ही उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) जो वर्ष 2013-14 में 23.0 था, वह बढ़कर 2023-14 में 30.0 पर पहुंच गया है।

प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis & FAQ) प्रश्न 1: क्या पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत लोन लेने के लिए किसी गारंटर या गिरवी रखने के लिए संपत्ति की जरूरत होती है? उत्तर: नहीं। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यही है कि शीर्ष गुणवत्ता वाले संस्थानों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को बिना किसी जमानत (Collateral-free) और बिना किसी गारंटर के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

प्रश्न 2: ब्याज सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए पारिवारिक आय की क्या सीमा है और सब्सिडी कैसे मिलती है? उत्तर: जिन छात्रों की वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख रुपये तक है, वे 10 लाख रुपये तक के लोन पर 3% ब्याज सब्सिडी के पात्र हैं। यह राशि पारदर्शी तरीके से डीबीटी (DBT) के जरिए सीधे छात्र के ऋण खाते में डिजिटल रूप से जमा की जाती है, बशर्ते छात्र किसी अन्य स्कॉलरशिप का लाभ न ले रहा हो। ​(Published By: Ravi Pandey)

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