केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार संसद के आगामी सत्र

निजी कंपनियां लगा सकेंगी देश में परमाणु ऊर्जा संयंत्र

निजी कंपनियां लगा सकेंगी देश में परमाणु ऊर्जा संयंत्र

मोदी सरकार संसद में पेश करेगी "एटॉमिक एनर्जी बिल" 

शीतकालीन सत्र में 10 महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी

नई दिल्ली।  केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार संसद के आगामी सत्र में एटॉमिक एनर्जी बिल समेत 10 नए बिल पेश करेगी। इस बिल के पास होने के बाद निजी कंपनियों को "परमाणु ऊर्जा संयंत्र" लगाने की मिल सकेगी अनुमति। यह जानकारी लोकसभा की संसद की कार्यवाही को लेकर जारी बुलेटिन में दी गयी है। संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होगा जो 19 दिसंबर तक चलेगा। 

संसद के आगामी सत्र के लिए जारी लोकसभा बुलेटिन में केन्द्र ने अपने विधायी एजेंडा में 10 बिल संसद में प्रस्तुत करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें सबसे अहम है एटॉमिक एनर्जी बिल जिसमें प्राइवेट कंपनियों को भी न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगाने की अनुमति मिल सकेगी।

संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पेश किये जाने वाले बिल में कुल 10 नए बिल का ब्योरा दिया गया है। इसमें एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025, भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक, राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण बिल शामिल हैं। इनमें सबसे अहम एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025 है। यह बिल प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की इजाजत देगा। 

शीतकालीन सत्र में शीतकालीन सत्र में 10 बिल पेश होंगे। इसकी सूची इस प्रकार है (

1. एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025। 2. हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया।  3.नेशनल हाईवे (अमेंडमेंट) बिल। 4.कॉर्पोरेट लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2025। 5.सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल (SMC), 2025। 6.मणिपुर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (अमेंडमेंट) बिल। 7.कांस्टीट्यूशन (131वां संशोधन) बिल, 2025। 8.रिपीलिंग एंड अमेंडमेंट बिल, 2025। 9.ऑर्बिट्रेशन एंड कॉन्सीलिएशन (अमेंडमेंट) बिल, 2025। 10.इंश्योरेंस लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2025।

पेश होने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों का ब्योरा (संक्षेप में)  - 

1. 'परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025'

यह बिल भारत में परमाणु ऊर्जा के उपयोग और रेगुलेशन को नियंत्रित करने के उद्देश्य लाया जा रहा है। यह बिल प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की इजाजत देगा। अभी देश में सभी न्यूक्लियर पावर प्लांट NPCIL जैसी सरकारी कंपनियों के जरिए बनाए जाते हैं। नए बिल में बदलाव के बाद, भारतीय और विदेशी, दोनों तरह की प्राइवेट कंपनियां न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन में आ सकेंगी।

2. उच्च शिक्षा आयोग विधेयक - 

प्रस्तावित कानून विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र और स्वशासी संस्थान बनने और मान्यता और स्वायत्तता की एक मजबूत और पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए भारत के एक उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।

3. नेशनल हाईवे (अमेंडमेंट) बिल - 

राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक भी परिचय के लिए सूचीबद्ध है। इस विधेयक के पारित होने के बाद हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण में तेजी आएगी। नेशनल हाईवे (अमेंडमेंट) बिल जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और अधिक ट्रांसपेरेंट बनाएगा, ताकि नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स में देरी कम हो सके।

4. कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक - 

कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 भी सरकार के एजेंडे में शामिल है। इसका उद्देश्य व्यवसाय करने में आसानी की सुविधा के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 और एलएलपी (सीमित देयता भागीदारी) अधिनियम, 2008 में संशोधन करना है।

5. प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक

सरकार इस सत्र में प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (एसएमसी), 2025 पेश कर सकती है। ये बिल भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992, डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 और प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को एक तर्कसंगत एकल प्रतिभूति बाजार संहिता में समेकित करने का प्रस्ताव करता है।

6. संविधान संशोधन से जुड़ा बिल - 

ये बिल अधिसूचित है पर अब सरकार ने इस बिल को पेश करने से इन्कार कर दिया है।  सरकार का इस सत्र में संविधान में 131वें संशोधन का प्रस्ताव एजेंडे में था। इस बिल के तहत, खास तौर पर चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाया जाना था। हालांकि, बुलेटिन से इतर केंद्र सरकार की तरफ से सफाई आ गई है।

7. मध्यस्थता और सुलह अधिनियम संशोधन बिल - 

कंपनियों और लोगों के बीच विवाद अक्सर सालों तक कोर्ट में पेंडिंग रहते हैं। आर्बिट्रेशन और सुलह (संशोधन) बिल, 2025 का मकसद आर्बिट्रेशन के फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया को आसान बनाना और विवादों का तेज़ी से समाधान करना है।

इसके अलावा पिछले सत्र के दो विधेयक भी विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं। संसदीय बुलेटिन के अनुसार, वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी एजेंडे में है। संसद का शीतकालीन सत्र आगामी एक दिसंबर को शुरू होगा। कुल 15 कार्य दिवस वाला यह सत्र 19 दिसंबर को समाप्त होगा। अन्य विधेयक अध्यक्ष की अनुमति से कार्रवाई के दौरान आ सकते हैं।

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