आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुर

'सरपंच पति' प्रथा पर राघव चड्ढा की चिंता, महिलाओं के असली अधिकारों की उठाई मांग

Raghav Chadha Raises Concern Over ‘Sarpanch Pati’ Practice

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को "सरपंच पति" या "पंचायत पति" की प्रथा पर चिंता जताई। इस प्रथा में, आरक्षित पंचायत सीटों पर चुनी गई महिलाएं अक्सर सिर्फ नाममात्र की मुखिया होती हैं, जबकि असली सत्ता उनके पुरुष रिश्तेदार चलाते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि स्थानीय निकायों में महिला प्रतिनिधि 73वें संवैधानिक संशोधन के तहत तय किए गए असली अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

संवैधानिक अधिकार बनाम जमीनी हकीकत

सांसद राघव चड्ढा ने अपने एक एक्स पोस्ट में लिखा कि, "आप में से कितने लोगों ने 'सरपंच पति' या 'पंचायत पति' शब्द सुने हैं? कई जगहों पर, महिलाओं के लिए आरक्षित पंचायत सीट पर किसी पुरुष नेता की पत्नी, बेटी, बहन या बहू चुनाव लड़ती है, जबकि असली सत्ता वही पुरुष चलाता रहता है। इसीलिए ये शब्द इतने आम हो गए हैं। 73वें संवैधानिक संशोधन में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य किया गया था, ताकि स्थानीय शासन में महिलाओं की आवाज़ भी शामिल हो सके। लगभग 31 लाख चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों में से, लगभग एक तिहाई महिलाएं हैं।"

‘प्रॉक्सी शासन’ पर सख्त सवाल, सरकार से जवाब और कार्रवाई की मांग

उन्होंने आगे कहा, "लेकिन जब कोई चुनी हुई महिला प्रतिनिधि सिर्फ चेहरा बनकर रह जाती है, और सत्ता का इस्तेमाल कोई पुरुष रिश्तेदार करता है, तो इससे एक समानांतर, बिना चुनाव वाली सत्ता खड़ी हो जाती है। यह एक तरह का 'प्रॉक्सी शासन' है, जिसकी संविधान ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। ठीक इसी वजह से मैंने पिछले हफ़्ते संसद में एक पूरक प्रश्न के ज़रिए यह मुद्दा उठाया था। क्या सरकार यह मानती है कि ऐसी प्रथा मौजूद है? और यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं कि पंचायतों में चुनी गई महिलाएं असली सत्ता का इस्तेमाल करें, न कि सिर्फ़ नाम के लिए सीट पर बैठी रहें?"

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