रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ की सभी पारंपरि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ की मिसाइल तकनीक उद्योगों को हस्तांतरित करने को दी मंजूरी

Rajnath clears DRDO missile tech transfer

नई दिल्ली [भारत]: रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की प्रौद्योगिकियों को स्वदेशी उत्पादन के लिए भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना और देश के रक्षा तंत्र में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना है।

भारतीय कंपनियां कर सकेंगी मिसाइलों का स्वदेशी उत्पादन

मंत्रालय ने कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) के जरिए भारतीय कंपनियां लागू योग्यताओं, प्रमाणन और नियामक आवश्यकताओं के अधीन पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों का स्वदेशी उत्पादन कर सकेंगी। यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की परिकल्पना को साकार करने और रक्षा विनिर्माण में भारतीय उद्योगों की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता होगी मजबूत

इस हस्तांतरण से योग्य घरेलू उद्योग डीआरडीओ द्वारा विकसित मिसाइल प्रौद्योगिकियों का देश के भीतर निर्माण कर सकेंगे। इससे भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है। भारत अपने स्वदेशी हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम को भी लगातार आगे बढ़ा रहा है। इसके तहत डीआरडीओ हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहा है।

रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ने का दावा

इससे पहले, 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डीआरडीओ पर जोर देते हुए भारत के रक्षा विनिर्माण आधार के विस्तार को रेखांकित किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ गया है।" प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार स्वदेशी विनिर्माण को मजबूत करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रही है।

2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और वित्त वर्ष 2020-21 के 84,643 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें 110 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्वदेशी रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 से लगभग चार गुना बढ़ गया है। रक्षा निर्यात भी वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का है। निजी क्षेत्र भी भारत के रक्षा औद्योगिक आधार में तेजी से महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का योगदान लगभग 76 प्रतिशत था।

(एएनआई)

यह भी पढ़ें: प्रकाश नायर के डिजाइन में तैयार हैदराबाद का अनोखा स्कूल, बच्चों के लिए खास है हर कोना