रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल तक आधिकार

21 अप्रैल से तीन दिवसीय यात्रा पर जर्मनी जाएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Rajnath Singh’s 3-Day Germany Visit from April 21

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने रविवार को घोषणा की कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल तक आधिकारिक यात्रा पर जर्मनी जाएंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मज़बूत करना है। अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान सिंह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

रक्षा उद्योग, AI और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर होगी चर्चा

रक्षा मंत्रालय (MoD) के मुताबिक, चर्चा का मुख्य बिंदू रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाना, सैन्य-से-सैन्य जुड़ाव को मज़बूत करना और साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन जैसे उभरते क्षेत्रों में अवसरों की तलाश करना होगा। दोनों रक्षा मंत्रियों की उपस्थिति में एक 'रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप' और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों के प्रशिक्षण में सहयोग के लिए एक 'कार्यान्वयन व्यवस्था' पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

मेक-इन-इंडिया के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन पर फोकस

यह यात्रा पहले से जारी रक्षा सहयोग पहलों की समीक्षा करने और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर प्रदान करेगी। राजनाथ सिंह के जर्मनी के रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी बातचीत होने की उम्मीद है, ताकि मेक-इन-इंडिया पहल के तहत संयुक्त विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

7 साल बाद हो रही अहम यात्रा

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रक्षा मंत्री की यह यात्रा 7 साल के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले किसी भारतीय रक्षा मंत्री ने फरवरी 2019 में निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में जर्मनी की यात्रा की थी। बोरिस पिस्टोरियस ने जून 2023 में भारत का दौरा किया था और राजनाथ सिंह के साथ विस्तृत वार्ता की थी।

भारत-जर्मनी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

भारत और जर्मनी एक मज़बूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। हाल के वर्षों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। इसके अलावा, इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करना तथा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देना है।

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