रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में डाले 50000 करोड़ रुपये
रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में डाले 50000 करोड़ रुपये
बाजार में नकदी की संभावित किल्लत को रोकने के लिए उठाया कदम
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में बैंकिंग सिस्टम में तरलता बनाए रखने और भविष्य में कैश की अचानक कमी को रोकने के इरादे से बैंकिंग सिस्टम में 50,000 करोड़ रुपये डाले हैं। RBI ने सोमवार को बैंकिंग सिस्टम में कैश की स्थिति को संभालने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद के जरिये 50,000 करोड़ रुपये डाले। यह धनराशि खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत डाली गयी है।
आरबीआई ने बैंकिंग व्यवस्था में नकदी डालने के दौरान बताना कि वर्तमान में बैंकिंग सिस्टम में तरलता का अधिशेष करीब 2.41 लाख करोड़ रुपये है। इसका मतलब है कि बैंक के पास जरूरत से ज्यादा कैश मौजूद है। ओएमओ के जरिए यह कैश सिस्टम में डालना इसलिए जरूरी था क्योंकि इस महीने के अंत में अग्रिम कर और जीएसटी के भुगतान होने हैं। इससे बैंकिंग सिस्टम से नकदी बड़ी मात्रा में निकल सकती थी।
ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के जरिए आरबीआई सरकारी बॉन्ड्स खरीदकर या बेचकर बैंकिंग सिस्टम में नकदी का संतुलन बनाए रखता है। जब आरबीआई बॉन्ड खरीदता है, तो बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा नकदी आती है। वहीं, जब वह बॉन्ड बेचता है, तो कैश बैंकिंग सिस्टम से बाहर जाती है। इस तरह, ओएमओ से बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनाए रखना और महंगाई को नियंत्रित करना आसान होता है।
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से अब तक केंद्रीय बैंक ने ओएमओ के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कर करीब 2.50 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में डाले हैं। यह दिखाता है कि आरबीआई लगातार तरलता प्रबंधन कर रहा है और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
आरबीआई ने विभिन्न सरकारी बॉन्ड्स (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) की खरीद करते हुए यह धनराशि बैकिंग सिस्टम में डाली है। आरबीआई ने बताया कि उसने 13,507 करोड़ रुपये मूल्य के 6.33 फीसदी सरकारी प्रतिभूति (जीएस) 2035 बॉन्ड, 13,494 करोड़ रुपये मूल्य के 6.01 फीसदी जीएस 2030 बॉन्ड, 8,157 करोड़ रुपये मूल्य के 6.10 फीसदी जीएस 2031 बॉन्ड और 6,955 करोड़ रुपये मूल्य के 7.30 फीसदी जीएस 2053 बॉन्ड खरीदे। इनके अलावा, 4,479 करोड़ रुपये मूल्य के 7.18 फीसदी जीएस 2033 बॉन्ड, 2,304 करोड़ रुपये मूल्य के 6.92 फीसदी जीएस 2039 बॉन्ड और 1,104 करोड़ रुपये के 6.19 फीसदी जीएस 2034 बॉन्ड खरीदे गए हैं।
वर्तमान में बैंकिंग प्रणाली में तरलता अधिशेष (जरूरत से अधिक नकदी) 2.41 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। यह ओएमओ खरीद नीलामी बैंकिंग प्रणाली से बड़े पैमाने पर नकदी निकासी की आशंका को देखते हुए की गई। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, चालू कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से अब तक केंद्रीय बैंक ओएमओ के जरिये सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कर लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपये की नकदी डाल चुका है।
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