बैंकिंग सेवाओं में हिडेन चार्जेज पर RBI लगाम लगाने के मूड में
मुंबई। देश के विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों द्वारा ग्राहकों पर बैंकिंग सेवाओं के बदले अक्सर ऐसे चार्ज लगाये जाते हैं जिनकी जानकारी उपभोक्ताओं को खाते से पैसे कट जाने के बाद होती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हिडेन बैंकिंग चार्जेज को लेकर अब बैंकों पर सख्ती के मूड में दिख रहा है। आरबीआई बैंकों के साथ मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाने पर काम कर रहा है, जिसमें सभी तरह की फीस और सर्विस चार्ज का खुलासा एक ही फॉर्मेट में हो।
छुपे और दोहरे शुल्क खत्म करने और ग्राहकों को पूरी जानकारी देने का निर्देश
इकोनामिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मकसद छुपे हुए (Hidden) और दोहरे (Overlapping) चार्जेज को खत्म करना है। साथ ही, बैंकों को अब लोन प्रोसेसिंग फीस, लोन समय पहले बंद करने की फीस और फाइल चार्ज जैसे शुल्क का पूरा ब्योरा ग्राहकों को देने के निर्देश दिये जा रहे हैं। बैंकिंग मामलों की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, RBI चाहता है कि ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाओं के चार्ज बिल्कुल साफ और सीधे हों।
सरकार की दखल के बाद ज्यादातर PSUs ने हटाया न्यूनतम बैलेंस पर लगने वाला जुर्माना
गौरतलब है कि सरकार के दखल के बाद, ज्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंकों ने इस साल की शुरुआत में ही मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना हटा दिया था। लेकिन कुछ बैंकों ने अभी इसे लागू नहीं किया है। एक बैंक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, अभी इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या सभी बैंकों में सर्विस चार्ज बताने का एक ही स्टैंडर्ड तरीका हो सकता है। इसमें लोन प्रोसेसिंग फीस का पूरा ब्रेक-अप भी शामिल होगा।