एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार RBI अक्टूबर में ब

अक्टूबर में RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें, बढ़ोतरी का चक्र हल्का रहने की संभावना: रिपोर्ट

RBI May Hike Rates in October, Cycle Likely to Be Mild: Report

नई दिल्ली (भारत)। महंगाई का दबाव, 100 डॉलर के पार कच्चा तेल और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ने के संकेत। इन सबके बीच RBI भी अक्टूबर में आम लोगों को झटका दे सकता है। एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी MPC बैठक में ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि दरों में बढ़ोतरी का यह चक्र हल्का रहने की संभावना है। आइए जानते हैं कि RBI के इस संभावित फैसले के पीछे क्या कारण हैं और इसका आपकी EMI पर कितना असर पड़ सकता है।

तीन बड़े बदलावों से बढ़ी दरों की संभावना

रिपोर्ट में ब्याज दरों के अनुमान में बदलाव के पीछे तीन प्रमुख घटनाक्रम बताए गए हैं। इनमें FCNR का प्रवाह लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचना शामिल है, जो उम्मीद से काफी अधिक है। दूसरा बड़ा कारण मध्य पूर्व में नए सिरे से बढ़ा तनाव है। इसके कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।

107 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड

रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड करीब 107.06 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि कच्चे तेल की कीमत करीब 102.92 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच सोमवार को एशियाई कारोबार की शुरुआत में तेल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड करीब 3.2 प्रतिशत बढ़कर 108 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 3.2 प्रतिशत बढ़कर 103.30 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया।

वैश्विक स्तर पर भी दरें बढ़ने के संकेत

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक मौद्रिक नीति में एक नए, हालांकि संभावित रूप से हल्के, सख्त चक्र के संकेत मिल रहे हैं। यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) ने पिछले सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की, जबकि बैंक ऑफ जापान (BOJ) और अमेरिकी फेडरल रिजर्व से भी दरें बढ़ाने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया, "इस पृष्ठभूमि में, RBI की अक्टूबर में होने वाली MPC बैठक काफी अहम है, और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पहले से कहीं अधिक है।"

अतिरिक्त तरलता को कम करने की कोशिश

रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज दरों में बढ़ोतरी RBI की मौद्रिक नीति को उसके तरलता प्रबंधन उपायों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद कर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI FCNR+ प्रवाह के कारण पैदा हुई करीब 4.3-4.7 ट्रिलियन रुपये की अतिरिक्त तरलता को कम करने की कोशिश कर रहा है। इससे RBI की नीति और तरलता संबंधी रुख में बेहतर तालमेल हो सकता है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र रहेगा हल्का

कुल मिलाकर, एमके ग्लोबल का अनुमान है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र हल्का रहेगा। RBI का व्यापक नीतिगत ध्यान घरेलू तरलता और विदेशी मुद्रा की स्थिति को संभालने पर केंद्रित रहने की संभावना है। (Source: ANI)

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