TV विज्ञापन कैप हटने से Regional GEC और FTA चैनलों को सबसे ज्यादा फायदा: रिपोर्ट
नई दिल्ली (भारत)। Elara Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, टेलीविजन पर प्रति घंटे 12 मिनट की विज्ञापन सीमा हटाने से पूरी इंडस्ट्री के विज्ञापन रेवेन्यू पर असर सीमित रह सकता है। हालांकि, इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा Regional General Entertainment Channels (GEC) और Free-to-Air (FTA) चैनलों को मिलने की संभावना है। दोनों श्रेणियों के चैनलों की हिस्सेदारी TV विज्ञापन खर्च में करीब 25-30% है। रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञापन कैप हटने से इन चैनलों को अतिरिक्त विज्ञापन इन्वेंट्री का फायदा मिल सकता है। सरकार ने ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और Ease of Doing Business को बढ़ावा देने के लिए विज्ञापन अवधि की सीमा हटाने की घोषणा की है।
कुल TV विज्ञापन रेवेन्यू में केवल 1-3% बढ़ोतरी का अनुमान
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सबसे अच्छी स्थिति में भी TV विज्ञापन रेवेन्यू में करीब 1-3% की बढ़ोतरी हो सकती है। Elara Capital के अनुसार, यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब टेलीविजन इंडस्ट्री पहले से संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। इंडस्ट्री के सामने मुख्य चुनौती विज्ञापन इन्वेंट्री की कमी नहीं, बल्कि दर्शकों का TV से दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर जाना और कंटेंट में सीमित इनोवेशन है। ऐसे में अतिरिक्त विज्ञापन समय उपलब्ध होने के बावजूद रेवेन्यू में बड़ा उछाल आना तय नहीं है। विज्ञापनदाताओं की मांग इस बदलाव से मिलने वाले वास्तविक फायदे में अहम भूमिका निभाएगी।
Pay-TV दर्शकों की संख्या में लगातार गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में TV देखने वाले परिवारों की कुल संख्या करीब 193 मिलियन बनी हुई है। हालांकि, पारंपरिक Pay-TV का आधार लगातार कम हो रहा है। FY20-25 के दौरान Pay-TV परिवारों की संख्या में करीब 4% CAGR की गिरावट दर्ज की गई। CY25 में यह संख्या करीब 104 मिलियन रह गई, जिसमें अकेले इसी कैलेंडर वर्ष में 11 मिलियन परिवारों की कमी आई। इसके विपरीत, Connected-TV की पहुंच बढ़ रही है। साप्ताहिक रूप से सक्रिय Connected-TV परिवारों की संख्या 2024 में करीब 30 मिलियन से बढ़कर 40 मिलियन से अधिक हो गई है।
FMCG का TV AdEx में सबसे बड़ा हिस्सा, लेकिन हिस्सेदारी घटी
विज्ञापन खर्च में भी दर्शकों के बदलते व्यवहार का असर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, FMCG सेक्टर अभी भी TV AdEx में करीब 46% हिस्सेदारी रखता है। हालांकि, पिछले पांच वर्षों में इसकी हिस्सेदारी 426 बेसिस पॉइंट्स कम हुई है। दूसरी ओर, eCommerce की हिस्सेदारी करीब 16% रही और इसमें साल-दर-साल आधार पर बड़ा बदलाव नहीं हुआ। इससे संकेत मिलता है कि TV विज्ञापन बाजार में प्रमुख विज्ञापनदाताओं का पैटर्न बदल रहा है। ऐसे माहौल में केवल विज्ञापन के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध होना इंडस्ट्री के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
News और Regional चैनल पहले से दिखा रहे हैं ज्यादा विज्ञापन
रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीविजन इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा पहले ही पुरानी 12 मिनट प्रति घंटे की विज्ञापन सीमा के बराबर या उससे अधिक विज्ञापन दिखा रहा था। News चैनलों की TV AdEx में करीब 7-8% हिस्सेदारी है और वे आमतौर पर प्रति घंटे 16-18 मिनट तक विज्ञापन दिखाते हैं। कुछ Regional चैनल भी पहले से निर्धारित सीमा से अधिक विज्ञापन दिखाते रहे हैं। Live Sports की TV AdEx में करीब 22-24% हिस्सेदारी है, लेकिन कार्यक्रम में बाधा डाले बिना वहां अतिरिक्त विज्ञापन इन्वेंट्री बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। ऐसे में सबसे ज्यादा अतिरिक्त क्षमता Hindi GEC सेगमेंट में दिखाई देती है।
Hindi GEC के लिए विज्ञापनदाता की मांग सबसे बड़ी चुनौती
Hindi General Entertainment Channels की TV AdEx में करीब 26% हिस्सेदारी है और ये चैनल आमतौर पर पुरानी विज्ञापन सीमा के करीब काम करते रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार Hindi GEC के लिए मुख्य समस्या विज्ञापन इन्वेंट्री की उपलब्धता नहीं बल्कि विज्ञापनदाताओं की मांग है। दर्शकों के बंटवारे और कंटेंट में सीमित इनोवेशन के कारण अतिरिक्त विज्ञापन समय का पूरा फायदा मिलना मुश्किल हो सकता है। यदि विज्ञापनदाता अतिरिक्त इन्वेंट्री को स्वीकार करने के लिए पर्याप्त मांग नहीं दिखाते हैं, तो इससे रेवेन्यू बढ़ने की बजाय कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसलिए विज्ञापन कैप हटना अपने आप में बड़े रेवेन्यू ग्रोथ की गारंटी नहीं है।
कमजोर मांग से विज्ञापन दरों पर पड़ सकता है दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत विज्ञापन मांग और बेहतर इन्वेंट्री उपयोग से ब्रॉडकास्टर्स अतिरिक्त विज्ञापन मिनटों को प्रभावी ढंग से कमाई में बदल सकते हैं। ऐसी स्थिति में विज्ञापनदाताओं की मांग मजबूत रहने पर ब्रॉडकास्टर्स अपनी यील्ड को बनाए रखते हुए अतिरिक्त इन्वेंट्री से फायदा उठा सकते हैं। दूसरी ओर, अगर मांग कमजोर रहती है तो विज्ञापनदाताओं की मोलभाव करने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे विज्ञापन दरों पर नीचे की ओर दबाव पड़ने की संभावना है। ऐसे में अतिरिक्त विज्ञापन मिनट मिलने के बावजूद ब्रॉडकास्टर्स की वास्तविक कमाई सीमित रह सकती है।
Regional GEC और FTA चैनलों में सबसे बड़ा अवसर
Elara Capital के अनुमान के अनुसार, अगर TV AdEx का करीब 25% हिस्सा इस बदलाव से लाभ उठाता है और कीमतों में संभावित कमी के बाद 5-10% नेट अतिरिक्त विज्ञापन रेवेन्यू पैदा करता है, तो पूरी इंडस्ट्री में रेवेन्यू बढ़ोतरी केवल करीब 1-3% रह सकती है। रिपोर्ट ने खास तौर पर Regional GEC और FTA चैनलों को इस बदलाव से सबसे ज्यादा लाभ पाने वाले सेगमेंट के रूप में चिन्हित किया है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी TV AdEx में करीब 25-30% है। इन चैनलों में अतिरिक्त विज्ञापन इन्वेंट्री को कमाई में बदलने की संभावनाएं अधिक बताई गई हैं। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा विज्ञापनदाताओं की मांग और कीमतों पर निर्भर करेगा।
कमाई की ग्रोथ और वैल्यूएशन पर बड़ा असर संभव नहीं
कुल मिलाकर, Elara Capital के अनुसार विज्ञापन अवधि की सीमा हटाना ब्रॉडकास्टर्स की कमाई के लिए सकारात्मक बदलाव है। हालांकि, इसका प्रभाव इतना सीमित रहने की संभावना है कि इससे इंडस्ट्री की अर्निंग ग्रोथ में कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव नहीं आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के लिए अतिरिक्त कमाई का अवसर जरूर पैदा करता है। लेकिन कमजोर दर्शक आधार, कंटेंट इनोवेशन की कमी और विज्ञापनदाताओं की मांग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए इस नियामकीय बदलाव से टेलीविजन कंपनियों के वैल्यूएशन में बड़े स्तर पर स्ट्रक्चरल री-रेटिंग की संभावना कम है। (Source: ANI)
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