रिजिजू ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि

किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर हमला, बोले- 'कांग्रेस माओवादी पार्टी बनती जा रही है'

Rijiju Attacks Congress, Calls It ‘Maoist Party’

नई दिल्ली [भारत]: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए "दिमागी नक्सल" वाले बयान को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस धीरे-धीरे "माओवादी पार्टी" में तब्दील होती जा रही है।

'दिमागी नक्सल' बयान पर मचा सियासी घमासान

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में "दिमागी नक्सल" भी मौजूद हैं, जिन्हें पहचानकर अलग-थलग करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री के इस बयान की कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की। कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर लिखा था, "मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है!"

'प्रधानमंत्री ने किसी विपक्षी दल को निशाना नहीं बनाया'

एएनआई से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान किसी विशेष विपक्षी पार्टी को निशाना बनाकर नहीं दिया गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को लगा कि प्रधानमंत्री का इशारा उनकी पार्टी की ओर था। रिजिजू ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में पहले "ऐसी विचारधारा रखने वाले व्यक्तियों का वर्चस्व" था और अब कांग्रेस "माओवादी पार्टी में बदलती दिख रही है।"

'कांग्रेस खुद को माओवादी संगठन में बदल रही'

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "एक तरह से, कांग्रेस पार्टी ने खुद को माओवादी और नक्सलवादी संगठन में बदल लिया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब "माओवादी पार्टी बनने की ओर अग्रसर" है और उसकी तुलना मुस्लिम लीग से भी की।

'वैचारिक नक्सलवाद में अलगाववादी सोच शामिल'

रिजिजू ने कहा कि "वैचारिक नक्सलवाद" में अलगाववादी प्रवृत्तियों का समर्थन करने वाले लोग और समूह शामिल हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 की बहाली की वकालत करने और पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने की कोशिशों का भी जिक्र किया।

'शहरी इलाकों में अभी भी मौजूद है विचारधारा'

रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कही बात को ही दोहराया है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के बयान के अनुरूप माओवाद और नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना गया था और इसे जड़ से खत्म करने की जरूरत है। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के खिलाफ हथियार उठाने वाले नक्सलियों को काफी हद तक खत्म किया जा चुका है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में यह विचारधारा अभी भी मौजूद है।

'दिमागी नक्सल' की परिभाषा पर रिजिजू का बयान

रिजिजू ने कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया है कि नक्सलवाद का क्या अर्थ है और "दिमागी नक्सल" से उनका क्या आशय है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग देश के विखंडन की वकालत करते हैं, अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं या पूर्वोत्तर के विभाजन की मांग करते हैं। रिजिजू ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे लोग नक्सली हिंसा में मारे गए सेना, CRPF, SSB, BSF, ITBP, CISF और NSG के जवानों के परिवारों के प्रति सहानुभूति नहीं रखते।

मनमोहन सिंह के बयान का भी किया जिक्र

सोमवार को रिजिजू ने कांग्रेस पर हमला करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के बयान का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश के सामने मौजूद "सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती" बताया था। रिजिजू ने कांग्रेस से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के परिवार से माफी मांगने की मांग भी की।

कांग्रेस ने बताया राजनीतिक अपमान

वहीं, कांग्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने "दिमागी नक्सल" शब्द को भाजपा द्वारा राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाने वाला "अपमान" बताया है। कांग्रेस ने इसे "शहरी नक्सल", "आंदोलनजीवी" और "टुकड़े-टुकड़े गैंग" जैसे पुराने राजनीतिक लेबल का नया रूप बताया है।

(एएनआई)

यह भी पढ़े: उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर, देहरादून में 97 सड़कें बंद; आज स्कूल रहेंगे बंद