ACP मनस्वी वशिष्ठ के सस्पेंशन के बाद रोहिणी कोर्ट

ACP मनस्वी वशिष्ठ के सस्पेंशन के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने वापस ली हड़ताल, आज से सामान्य होगा कामकाज

Rohini Court Bar Association Calls Off Strike After ACP's Suspension

नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली पुलिस के ACP मनस्वी वशिष्ठ के सस्पेंशन के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने 3 नवंबर को न्यायिक कार्यों से दूर रहने का अपना फैसला वापस ले लिया है। एसोसिएशन ने मंगलवार को जारी जरूरी नोटिस में इसकी जानकारी दी। नोटिस के मुताबिक, सक्षम अधिकारियों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया है। इसके बाद कार्यकारी समिति ने तत्काल प्रभाव से विरोध प्रदर्शन और हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्यों से नियमित न्यायिक कार्य दोबारा शुरू करने की अपील की है।

बार एसोसिएशन ने सदस्यों को जारी किया नोटिस

रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि ACP के खिलाफ कार्रवाई होने के बाद काम से दूर रहने का पहले लिया गया फैसला वापस ले लिया गया है। एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने घटनाक्रम की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया। नोटिस में सभी सदस्यों से अदालतों में नियमित कामकाज शुरू करने का आग्रह किया गया है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि अदालती कार्यवाही पहले की तरह जारी रहेगी। यह नोटिस बार एसोसिएशन के मानद सचिव एडवोकेट प्रदीप खत्री ने जारी किया।

पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए थे ACP

ACP मनस्वी वशिष्ठ पुलिस मुख्यालय के बाहर दिल्ली पुलिस के जवानों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। पुलिसकर्मी दो अधिकारियों के ट्रांसफर के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए थे। इस घटनाक्रम के बाद वकीलों और पुलिस प्रशासन के बीच विवाद सामने आया। वकीलों ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान ACP ने उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इसी मामले को लेकर बार एसोसिएशन ने पहले न्यायिक कार्यों से दूर रहने का फैसला लिया था।

पुलिस कमिश्नर से की गई थी ACP को सस्पेंड करने की मांग

इससे पहले 3 नवंबर को रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन, राउज एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन और अन्य वकीलों ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की थी। उन्होंने सोमवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में ACP मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड करने की मांग की थी। ACP के सस्पेंशन के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपना विरोध वापस लेने का फैसला किया।

28 अक्टूबर को ऑल दिल्ली बार एसोसिएशन ने किया था हड़ताल का ऐलान

इससे पहले 28 अक्टूबर को ऑल दिल्ली बार एसोसिएशन की समन्वय समिति (कोऑर्डिनेशन कमिटी) ने न्यायिक कार्यों से दूर रहने का आह्वान किया था। यह फैसला दिल्ली पुलिस द्वारा गांधी नगर के ACP और शाहदरा पुलिस स्टेशन के SHO के ट्रांसफर के बाद लिया गया था। इसके बाद वकील दो दिनों तक न्यायिक कार्यों से दूर रहे थे। हालांकि, उसी शाम समिति ने सर्कुलर जारी कर काम से दूर रहने का फैसला वापस लेने और अगले दिन से न्यायिक कामकाज शुरू करने की घोषणा की थी।

23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे वकील

समिति के सर्कुलर के मुताबिक, 23 अक्टूबर की शाम कुछ वकील एक घटना के सिलसिले में उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करने शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। वहां मौजूद ACP और SHO ने वकीलों को भरोसा दिलाया था कि मामले में नामजद लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। सर्कुलर में यह भी कहा गया कि उस समय संबंधित आरोपी पुलिस स्टेशन में ही मौजूद थे।

आरोपियों को छोड़ने के बाद वकीलों ने जताई थी नाराजगी

सर्कुलर के अनुसार, 24 अक्टूबर को वकीलों को जानकारी मिली कि संबंधित लोगों को गिरफ्तार करने के बजाय छोड़ दिया गया है। इसके बाद वकील मामले को संभालने के तरीके पर अपनी चिंता जताने और कानून के मुताबिक जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे। आरोप है कि इसी दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने वहां मौजूद वकीलों को धमकाया और डराने-धमकाने की कोशिश की। इसी घटनाक्रम के बाद वकीलों और पुलिस प्रशासन के बीच विवाद बढ़ा था।

वकीलों के सम्मान और हितों की रक्षा का भरोसा

रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपने नोटिस में हड़ताल के दौरान सदस्यों की एकजुटता और सहयोग की सराहना की। एसोसिएशन ने कहा कि कानूनी बिरादरी की गरिमा और सम्मान बनाए रखने के लिए सदस्यों ने एकजुटता दिखाई। साथ ही, एसोसिएशन ने दोहराया कि वह अपने सदस्यों की गरिमा, आत्मसम्मान और कल्याण के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा। कानूनी बिरादरी के हितों पर आंच आने की स्थिति में जवाबदेही तय करने और उचित कार्रवाई की मांग भी जारी रखेगा। (Source: ANI)

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