SCO Summit 2026 में PM मोदी ने आतंकवाद पर जीरो टॉल

SCO Summit: आतंकवाद पर PM मोदी का कड़ा संदेश, कहा- 'साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलना होगा'

PM Modi addresses the 26th SCO Summit

बिश्केक (किर्गिस्तान)। किर्गिस्तान के बिश्केक में मंगलवार को आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि संघर्षों के समाधान का रास्ता केवल संवाद और कूटनीति से होकर गुजरता है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ किसी तरह के दोहरे मानदंड की गुंजाइश नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री ने SCO के अगले 25 वर्षों के एजेंडे में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों को प्रमुख आधार बनाने पर जोर दिया।

मोदी ने सदस्य देशों से आतंकवादी वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने वैश्विक अस्थिरता के दौर में SCO की 25 साल की सहयोग की नींव को ठोस परिणामों में बदलने की जरूरत बताई।

आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’, दोहरे मानदंड पर भी निशाना

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा, "विवादों और संघर्षों के समाधान के लिए संवाद तथा कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।" इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सख्त नीति अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए। प्रधानमंत्री के मुताबिक, आतंकवाद को रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने वाले देशों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट और कड़ा संदेश जाना जरूरी है।

मोदी ने आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को निशाना बनाने की जरूरत बताते हुए कहा कि आतंकियों की फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "SCO के विजन को साकार करने की कुंजी आतंकवाद के खतरे से लड़ना है। हमें आतंकवादी वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे तंत्र को ध्वस्त करना होगा।"

उन्होंने आगे कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और आतंकियों को शरण तथा समर्थन देते हैं, उन्हें यह स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए कि आतंकवाद कभी भी रणनीतिक संपत्ति नहीं बन सकता।

SCO के अगले 25 साल पर भारत का फोकस

26वां SCO शिखर सम्मेलन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा कि संगठन की स्थापना की शुरुआत के 25 साल पूरे होने का पड़ाव सामने है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके को SCO के अगले 25 वर्षों की दिशा तय करने के अवसर के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि अब संगठन को केवल संवाद और सहयोग की नींव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस सहयोग को जमीन पर दिखाई देने वाले ठोस परिणामों में बदलना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "इन 25 वर्षों में हमने सहयोग के लिए एक मजबूत नींव तैयार की है। अब अगले 25 वर्षों में हमारा लक्ष्य इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलना होना चाहिए।" मोदी ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता और अस्थिरता के बीच SCO देशों से अपने साझा भौगोलिक क्षेत्र को साझा अवसरों में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आज, जब दुनिया अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, हमें अपने साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलना होगा। अपने प्रयासों के जरिए हमें अपने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होगा।"

सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर होंगे अहम स्तंभ

प्रधानमंत्री मोदी ने SCO के भविष्य के एजेंडे के लिए तीन प्रमुख स्तंभों—सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर—पर काम करने की जरूरत बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि संगठन की साझा भौगोलिक स्थिति को आर्थिक और विकास संबंधी अवसरों में बदला जाए। उन्होंने कनेक्टिविटी को साझा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि मजबूत और भरोसेमंद कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय विकास को गति मिल सकती है।

मोदी ने कहा, "मजबूत और भरोसेमंद कनेक्टिविटी साझा विकास को आगे बढ़ाती है। भारत उन सभी पहलों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ती हैं, व्यापार को सुगम बनाती हैं और विकास के नए रास्ते खोलती हैं।"

टेक्नोलॉजी से किसानों तक, विकास का पैमाना क्या हो?

प्रधानमंत्री ने SCO के विकास के आकलन को केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों के जीवन में पैदा होने वाले नए अवसरों से जोड़ने की बात कही। उन्होंने टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्टअप और युवाओं की भागीदारी को संगठन के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। मोदी ने सवाल उठाया कि SCO देशों के प्रयासों से युवाओं के लिए कितने नए अवसर पैदा हुए, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले और किसानों को तकनीक से कितना लाभ मिला।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी सफलता का वास्तविक पैमाना यह होना चाहिए: हमारे प्रयासों ने युवाओं के लिए कितने नए अवसर पैदा किए? हमारे उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले? हमारी तकनीक से हमारे किसानों को कितना लाभ मिला? और हमारे नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ?"

भारत करेगा SCO Civilisation Dialogue Forum की मेजबानी

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी घोषणा की कि भारत SCO Civilisation Dialogue Forum के पहले संस्करण की मेजबानी करने के लिए तैयार है। यह पहल संगठन के सदस्य देशों के बीच सभ्यतागत और सांस्कृतिक संवाद को आगे बढ़ाने के भारत के प्रयास के तौर पर सामने आई। मोदी ने SCO के सहयोग के दायरे को सुरक्षा से आगे ले जाकर कनेक्टिविटी, तकनीक, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं की भागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया।

अस्थिर दुनिया में SCO के सामने बड़ी चुनौती

प्रधानमंत्री का संदेश मूल रूप से SCO के अगले चरण को लेकर भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। एक ओर उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बिना दोहरे मानदंड के कठोर रुख की जरूरत बताई, वहीं दूसरी ओर आर्थिक विकास और जन-केंद्रित अवसरों को संगठन के भविष्य से जोड़ने की कोशिश की।

मोदी ने SCO के 25 वर्षों के आधार को अगले 25 वर्षों की ठोस उपलब्धियों में बदलने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, साझा भूगोल तभी सार्थक होगा जब वह सदस्य देशों के नागरिकों, युवाओं, उद्यमियों और किसानों के लिए वास्तविक अवसर पैदा करे। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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