सितंबर में थोक महंगाई 10% के पार जा सकती है: विशेषज्ञ
नई दिल्ली: अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत में सितंबर 2026 की थोक मूल्य मुद्रास्फीति (WPI) 10 प्रतिशत के पार जा सकती है। प्रतिकूल आधार प्रभाव, वैश्विक कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी और खाद्य, ईंधन व विनिर्मित उत्पादों पर दबाव के चलते महंगाई के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है।
अगस्त में WPI बढ़कर 9.92% हुई
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के अनुसार, अगस्त 2026 में थोक महंगाई जुलाई के 9.78 प्रतिशत और जून के 9.97 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई। इस दौरान ईंधन और बिजली की महंगाई में तेज बढ़ोतरी हुई। यह जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत पहुंच गई। वहीं, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई भी 8.29 प्रतिशत से बढ़कर 8.37 प्रतिशत हो गई।
सितंबर में 10.2% तक पहुंचने का अनुमान
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने अनुमान जताया कि सितंबर 2026 में WPI महंगाई 10.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम एशिया संकट का स्थायी समाधान नहीं निकलता है तो महंगाई पूरे साल ऊंचे स्तर पर रह सकती है। पंत के मुताबिक, कम बारिश का अब तक खाद्य कीमतों पर बड़ा असर नहीं पड़ा है। खाद्य महंगाई में मौजूदा बढ़ोतरी मुख्य रूप से प्रतिकूल आधार प्रभाव के कारण है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट ने ईंधन और बिजली की कीमतों में पहले आई गिरावट को पलट दिया है।
7 विनिर्माण क्षेत्रों में दोहरे अंक की महंगाई
पंत ने विनिर्माण क्षेत्र में भी व्यापक मूल्य दबाव की ओर इशारा किया। अगस्त में तंबाकू उत्पाद, वस्त्र, रसायन, रबर और प्लास्टिक, आधार धातु, विद्युत उपकरण और अन्य विनिर्माण समेत 7 क्षेत्रों में दोहरे अंक की महंगाई दर्ज की गई। इन क्षेत्रों की WPI में कुल हिस्सेदारी करीब 26.3 प्रतिशत है। विशेषज्ञ के मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि महंगाई का दबाव केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है और यह अधिक व्यापक हो सकता है।
खाद्य महंगाई 20 महीने के उच्चतम स्तर पर
ICRA के प्रधान अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने बताया कि WPI महंगाई जुलाई के 9.8 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 9.9 प्रतिशत हो गई, जो ICRA के अनुमान के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण हुई। फलों और सब्जियों, दूध, मसालों और चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते अगस्त में खाद्य महंगाई जुलाई के 6.6 प्रतिशत से बढ़कर 7.1 प्रतिशत हो गई, जो 20 महीनों का उच्चतम स्तर है।
सितंबर-अक्टूबर में खाद्य महंगाई 10% के पार जा सकती है
अग्रवाल के अनुसार, प्रतिकूल आधार प्रभाव और कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सामान्य से अधिक बढ़ोतरी के कारण सितंबर-अक्टूबर में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है। उनका अनुमान है कि इस दौरान खाद्य महंगाई 9.5 से 10 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकती है। हालांकि, इसके बाद अनुकूल आधार प्रभाव के चलते इसमें कमी आने की संभावना है। यह तभी संभव होगा जब वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी कीमतों में आगे बड़ी बढ़ोतरी न हो।
(ANI)
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