SIR प्रदर्शन से त्योहारों पर व्यापार संकट: व्यापारी निकायों ने राहुल गांधी, PM और CJI को लिखा पत्र
नई दिल्ली। Voter List के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के बीच देश के प्रमुख व्यापार और उद्योग संगठनों ने सख्त रुख अपनाया है। व्यापारी निकायों ने कांग्रेस नेता व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर आगामी त्योहारी सीजन के दौरान व्यापारिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की बाधा न डालने और व्यापारियों के संरक्षण की गुहार लगाई है।
त्योहारों पर व्यापार ठप होने की आशंका
12 और 13 अक्टूबर को भेजे गए ज्ञापनों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और केरल के व्यापारिक संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि चक्का जाम, सड़कों की घेराबंदी और बाजारों में पाबंदियों के कारण नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक सीजन में करोड़ों रुपये के कारोबार को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
"राजनीतिक लड़ाई में बलि न चढ़े कारोबार"
व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन इसकी वजह से छोटे दुकानदारों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर संकट नहीं आना चाहिए।
फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FTII) ने नेता प्रतिपक्ष से आंदोलन को कुछ समय के लिए स्थगित करने की अपील करते हुए कहा, "हम हर राजनीतिक दल और नागरिक के विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करते हैं। लेकिन हजारों छोटे व्यापारी, दुकानदार और दिहाड़ी मजदूर अपनी सालभर की कमाई के लिए इसी त्योहारी सीजन पर निर्भर रहते हैं। किसी भी राजनीतिक विवाद में उनका व्यापार बलि का बकरा नहीं बनना चाहिए।"
सड़कों के बजाय संवाद का रास्ता चुनने की अपील
FTII और इंडियन रिकवर्ड पेपर ट्रेडर्स एसोसिएशन (IRPTA) ने राहुल गांधी से आग्रह किया है कि वे त्योहारी सीजन के दौरान सड़क पर होने वाले आंदोलनों को रोकें और अपनी मांगों को ज्ञापन, बातचीत या न्यायिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाएं।
दिल्ली और यूपी के व्यापार मंडल की चेतावनी
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (दिल्ली इकाई) के अध्यक्ष नवीन गर्ग ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनों के दौरान होने वाली हिंसा, दुकानों को नुकसान पहुंचने या एहतियातन बाजार बंद होने से भय का माहौल बनता है।
वहीं, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने दोटूक कहा कि राजनीतिक मतभेदों की आर्थिक कीमत देश का व्यापारी वर्ग नहीं चुकाएगा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनके व्यावसायिक हितों को लगातार नुकसान पहुंचाया गया, तो व्यापारी खुद भी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
राजस्थान से तीखे तेवर: CJI और PM से हस्तक्षेप की मांग
जयपुर व्यापार महासंघ (अध्यक्ष सुभाष गोयल) ने सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक आंदोलन छोटे दुकानदारों और कर्मचारियों के रोजगार पर सीधा हमला है।
महासंघ ने 12 अक्टूबर को राहुल गांधी को पत्र भेजने के बाद, 13 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर व्यावसायिक केंद्रों की सुरक्षा और निवेश व रोजगार को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से गुहार लगाई गई है कि राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण वैध व्यापारिक गतिविधियों पर रोक न लगने देने के संबंध में दिशानिर्देश/कानूनी सुरक्षा तय की जाए। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)