सोनम वांगचुक के इलाज को लेकर सफदरजंग अस्पताल और पर

सोनम वांगचुक की तबीयत पर विवाद: पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप, दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला

Sonam Wangchuk Health Row Reaches Delhi High Court

नई दिल्ली। 'पेपर लीक' के खिलाफ छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत और उनके इलाज को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद, अब उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। आंगमो का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट के पब्लिक हेल्थ बुलेटिन से वास्तविक आंकड़े छिपा रहा है और उन्हें इलाज के बहाने 'अवैध हिरासत' में रखा गया है। दूसरी ओर, अस्पताल के सूत्रों का दावा है कि मरीज की पोटेशियम रिपोर्ट परिवार को लिखित में दी गई थी और डॉक्टरों की टीम लगातार उन्हें सही इलाज के लिए काउंसिल कर रही है।

जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल तक का घटनाक्रम

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब 59 वर्षीय सोनम वांगचुक छात्रों के हक में भूख हड़ताल पर बैठे थे। 18 जुलाई की सुबह करीब 7:40 बजे दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से लेकर वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल पहुंची। अस्पताल में भर्ती किए जाने के समय वांगचुक होश में थे। डॉक्टरों के मुताबिक, शुरुआती जांच में उनकी पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन का स्तर स्थिर पाया गया था। हालांकि, भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर में पानी की कमी (म्यूकोसल ड्रायनेस) और त्वचा के लचीलेपन में कमी (डिक्रीज्ड स्किन टर्गोर) देखी गई थी।

इसके बाद जब डॉक्टरों ने उनके खून की जांच (ब्लड गैस एनालिसिस) की, तो उसमें कंपेंसेटेड एसिडोसिस के साथ सीरम पोटेशियम का स्तर गिरकर 2.9 mEq/l और ब्लड शुगर 78 mg/dl पाया गया। दोपहर 1:00 बजे तक दोबारा की गई जांच में पोटेशियम स्तर 2.92 mEq/l दर्ज हुआ, जबकि यूरिनरी कीटोन 1+ से बढ़कर 3+ तक पहुंच गया था, जो डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय था।

पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में सफदरजंग सरकारी अस्पताल की नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनका इस अस्पताल से भरोसा उठ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया, "अस्पताल ने हमें मौखिक रूप से बताया कि सोनम वांगचुक का पोटेशियम स्तर गिरकर 2.9 हो गया है, जो बेहद चिंताजनक और जानलेवा है। लेकिन जब उन्होंने पब्लिक हेल्थ बुलेटिन जारी किया, तो उसमें इस वास्तविक संख्या को बड़ी चालाकी से छुपा लिया गया और सिर्फ 'घटते पोटेशियम स्तर' का जिक्र किया गया।" आंगमो ने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने एक स्वतंत्र (प्राइवेट) लेबोरेटरी से जांच कराई, तो उसमें पोटेशियम का स्तर 3.5 आया, जो पूरी तरह से सामान्य श्रेणी में है।

भारी पुलिस बल की तैनाती और अस्पताल के दावों पर पलटवार

गीतांजलि आंगमो ने अस्पताल के माहौल पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस फ्लोर पर सोनम वांगचुक भर्ती हैं, वहां करीब 30 पुलिसकर्मी तैनात हैं और पूरे अस्पताल में 100 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं। इसके कारण परिवार की आवाजाही पर पाबंदियां लगा दी गई हैं। उन्होंने कहा, "यह मेडिकल केयर नहीं, बल्कि अवैध हिरासत है। बार-बार अनुरोध करने के बाद भी अस्पताल न तो उन्हें डिस्चार्ज कर रहा है और न ही हमें उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में ले जाने की अनुमति दे रहा है। अगर सोनम को कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और सरकार की होगी।" इसी वजह से उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई है।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष: 'हम लगातार कर रहे हैं काउंसिलिंग'

इस विवाद के बीच अस्पताल के सूत्रों ने आंगमो के आरोपों को खारिज किया है। सूत्रों का कहना है कि गीतांजलि आंगमो को शनिवार को जो 'पेशेंट समरी रिपोर्ट' सौंपी गई थी, उसमें मरीज के पोटेशियम स्तर का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टरों की एक बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) टीम लगातार मरीज और उनके परिवार की काउंसिलिंग कर रही है ताकि समय पर जरूरी मेडिकल हस्तक्षेप किया जा सके और तय ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का पालन हो सके। सूत्रों ने यह भी जोड़ा कि इलाज के जारी कोर्स के दौरान इस तरह के घटनाक्रम मरीज की चिकित्सा देखभाल और सुचारू प्रबंधन के लिए ठीक नहीं है।

हाई कोर्ट में दायर याचिका: क्या है मांग?

  • गीतांजलि आंगमो ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है। इस याचिका में मांग की गई है कि:
  • सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल में लगातार रखे जाने को चिकित्सा के बहाने 'अवैध और असंवैधानिक कैद' घोषित किया जाए।
  • उन्हें अस्पताल से तुरंत डिस्चार्ज करने या किसी अन्य अस्पताल में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाएं।
  • उनके परिवार, कानूनी सलाहकारों (वकीलों) और स्वतंत्र डॉक्टरों को उन तक बिना रोक-टोक पहुंचने की अनुमति मिले।
  • एक स्वतंत्र मेडिकल जांच के लिए सोनम वांगचुक के सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स परिवार को सौंपे जाएं।

​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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