राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर 19 दिनों से अनिश्चि

सोनम वांगचुक की 19वें दिन भूख हड़ताल पर बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों ने अंगों पर खतरे की जताई आशंका

Medical staff check Sonam Wangchuk's health

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर 19 दिनों से अनिश्चितकानीन भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। उनके इलाज में लगे डॉक्टर सतीश लांबा ने गुरुवार को चेतावनी दी है कि अगर यह भूख हड़ताल जारी रहा तो उनके कई अंगों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन

बता दें कि वांगचुक ने 28 जून, 2026 को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर अपना आंदोलन शुरू किया था। यह प्रदर्शन देश भर में परीक्षाओं में गड़बड़ी और चर्चित NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहा है। गुरुवार को मेडिकल ब्रीफिंग के दौरान मीडिया से बात करते हुए, डॉ. लांबा ने बताया कि लंबे समय तक चले इस उपवास का एक्टिविस्ट के शरीर पर कितना बुरा असर पड़ा है। वांगचुक का वजन अब 9 किलोग्राम से ज़्यादा कम हो चुका है। इससे इनका मौजूदा वजन घटकर 56.9 किलोग्राम रह गया है।

मेडिकल टीम चौबीसों घंटे रख रही है नजर

मेडिकल टीम चौबीसों घंटे उनके ज़रूरी स्वास्थ्य मानकों (वाइटल पैरामीटर्स) पर नजर रख रहे है। डॉ. लांबा ने वांगचुक की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, "आज, भूख हड़ताल के 19वें दिन, उनका कुल वजन 9 किलोग्राम से ज़्यादा कम हो गया है। आज उनका ब्लड शुगर 80 mg/dL है और पल्स रेट 72 बीट्स प्रति मिनट है। लेटने पर उनका ब्लड प्रेशर 105/61 mmHg और बैठने पर 101/65 mmHg है।"

भूख हड़ताल के दूसरे स्टेज में पहुंचे वांगचुक

हालांकि मेडिकल टीम ने कहा कि वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर (हाइड्रेशन) ठीक है और वे मानसिक रूप से सतर्क हैं, लेकिन उनके शरीर की अंदरूनी बायोकेमिस्ट्री में चिंताजनक बदलाव दिख रहे हैं। डॉ. लांबा के अनुसार, एक्टिविस्ट आधिकारिक तौर पर लंबे समय तक भूखे रहने की दूसरी स्टेज में पहुंच गए हैं। उन्होंने समझाते हुए कहा, "दूसरी स्टेज में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जो मांसपेशियों के टूटने और उनके इस्तेमाल का संकेत है। इससे खून में यूरिक एसिड बढ़ गया है।"

दिल्ली हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान, कहा- हर नागरिक की जिंदगी कीमती

इसी बीच गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा कि, "हर नागरिक की ज़िंदगी कीमती है और सरकारी अधिकारियों को इसे बचाने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए।" साथ ही, कोर्ट ने निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर चल रही भूख हड़ताल के दौरान क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की मेडिकल स्थिति की रोजाना क्लिनिकल निगरानी की जाए।

हाई कोर्ट ने दिए मेडिकल सहायता के निर्देश

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सरकारी डॉक्टरों की राय के आधार पर अगर किसी मेडिकल मदद की ज़रूरत हो, तो वह उपलब्ध कराई जाए। चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न बेंच ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार साहनी की जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए ये निर्देश जारी किए। साहनी ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर कोर्ट से दखल देने की मांग की थी।

तीसरे स्टेज का खतरा

वहीं, मेडिकल टीम ने बताया कि उपवास अब फैट और मांसपेशियों की खपत से हटकर महत्वपूर्ण आंतरिक प्रणालियों पर सीधा दबाव डाल रहा है। डॉ. लांबा ने चेतावनी देते हुए कहा, "अब हम संभावित तीसरी स्टेज का सामना कर रहे हैं, जो चिंताजनक हो सकती है और इसमें शरीर के अंगों पर असर पड़ सकता है। इसके लिए हमें wait and watch का तरीका अपनाना होगा। हम चौबीसों घंटे अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।" ​(भाषांतर: Ravi Pandey | इनपुट: ANI) यह भी पढ़ें: कटनी में सरकारी जमीन पर नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, दो क्रेशर प्लांट सीज