सोनिया गांधी का BJP पर हमला, बोलीं- 12 साल में लोकतांत्रिक संस्थाओं को पहुंचा गहरा नुकसान
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर पिछले 12 वर्षों के दौरान देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को गहरा नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र 'द हिंदू' को दिए साक्षात्कार में उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की जनता देश के लोकतंत्र को पुनः बहाल करेगी।
भाजपा पर तीखा हमला और लोकतंत्र पर चिंता
द हिंदू को दिए साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने कहा कि बीते 12 वर्षों में हमारे देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को काफी क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब इस नुकसान को समझने लगी है और उनमें बेचैनी बढ़ रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सरकार के जाने के बाद भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह से पटरी पर लाने में समय लगेगा। इसके लिए राजनीतिक दलों को कड़ा प्रयास करना होगा। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय मतदाता बेहतर शासन व्यवस्था की वापसी का स्वागत करेंगे।
1975 के आपातकाल पर सोनिया गांधी का नजरिया
1975 के 21 महीने लंबे आपातकाल पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि उस दौरान नागरिक अधिकारों को सीमित जरूर किया गया था और हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) को निलंबित किया गया था, लेकिन यह कदम पूरी तरह संवैधानिक दायरे में उठाया गया था।
उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक परिवहन को आग के हवाले किया जा रहा था। यहां तक कि नौकरशाही और सशस्त्र बलों को सरकार के आदेश न मानने के लिए उकसाया जा रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इन बिगड़ते हालात से निपटने के लिए संघर्ष कर रही थीं।
1977 में चुनाव और जनता से मांगी थी माफी
सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा कि आपातकाल का समाधान भी अंततः लोकतांत्रिक तरीके से ही निकाला गया। इंदिरा गांधी ने खुद हालात को समझा और मार्च 1977 में आम चुनाव कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव कराने के साथ ही इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों और गलतियों के लिए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया था और देश की जनता से औपचारिक रूप से माफी भी मांगी थी।
संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' और सार्वजनिक जीवन में प्रवेश
अपनी आगामी पुस्तक 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' के बारे में बताते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह केवल उनकी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रेम कहानी नहीं है। यह इस बात की भी कहानी है कि कैसे उन्हें राजीव के परिवार और भारत देश से प्यार हुआ।
उन्होंने साझा किया कि लंबे समय तक उनकी अपनी जिंदगी के बारे में बात करने की कोई इच्छा नहीं थी। लेकिन जब उन्होंने देखा कि राजीव गांधी और उनके परिवार द्वारा दिए गए बलिदानों का मकसद खतरे में है और कांग्रेस पार्टी कमजोर हो रही है, तब उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखने का फैसला किया। यह किताब युद्ध के बाद इटली में उनके बचपन, भारत आगमन, व्यक्तिगत त्रासदियों और उनके राजनीतिक सफर को रेखांकित करती है। (इनपुट: ANI)
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