सोनिया गांधी वोटर लिस्ट मामला: कोर्ट ने फैसला टाला, अब 21 सितंबर को सुनाया जाएगा आदेश
नई दिल्ली (भारत)। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामले में दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने शनिवार को फैसला टाल दिया। कोर्ट अब रिवीजन याचिका पर 21 सितंबर को आदेश सुनाएगी। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर दिया गया था और इसी मामले में FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
सोनिया गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका पर फैसला टला
कोर्ट ने उस रिवीजन याचिका पर आदेश सुनाना टाल दिया जिसमें कांग्रेस नेता के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। यह मामला उनके भारतीय नागरिक बनने से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। यह रिवीजन याचिका विकास त्रिपाठी ने दायर की थी। उनका आरोप है कि भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया था। वह इस मामले में FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर हुई रिवीजन याचिका
त्रिपाठी की FIR दर्ज करने की अर्जी को पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने रिवीजन याचिका के जरिए उस आदेश को चुनौती देते हुए सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। स्पेशल जज विशाल गोगने, जिनका तबादला हो चुका है, को 29 अगस्त को आदेश सुनाना था। उन्होंने 25 जुलाई को ही आदेश सुरक्षित रख लिया था।
सोनिया गांधी के वकील ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर उठाए सवाल
बहस के दौरान, सोनिया गांधी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आर एस चीमा और एडवोकेट तरन्नुम चीमा ने कहा कि रिवीजन याचिकाकर्ता द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेज असली नहीं थे। दूसरी ओर, रिवीजन याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अजय बर्मन और एडवोकेट नीरज ने तर्क दिया कि प्रतिवादी यह बताने में नाकाम रहे हैं कि भारतीय नागरिक बनने से पहले सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल किया गया।
1983 से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने का आरोप
यह मामला 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। 4 जुलाई को सोनिया गांधी ने इस मामले में अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर अपना जवाब दाखिल किया।
चुनाव आयोग की 1980 की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लाने की मांग
इससे पहले, 16 मई को त्रिपाठी ने एक अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने के लिए अर्जी दाखिल की थी। 18 अप्रैल को, जवाबी दलीलें पूरी होने के बाद, याचिकाकर्ता ने 1980 की चुनाव आयोग की एक रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी। इसके बाद, अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की अनुमति के लिए एक अर्जी दायर की गई।
कोर्ट ने पूछा- नागरिक बनने से पहले कैसे बनीं वोटर?
30 मार्च को, अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायतकर्ता की दलीलें और उनके वकील की बातें सुनीं। सुनवाई के दौरान, अदालत ने सोनिया गांधी के वकील से पूछा, "आप इस मुद्दे को कैसे नज़रअंदाज़ करेंगे कि सोनिया गांधी 1983 में भारत की नागरिक बनने से पहले ही वोटर बन गई थीं?"
सोनिया के वकील ने मामले को बताया बिना ठोस आधार की जांच
सोनिया गांधी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आर एस चीमा ने कहा कि यह मामला "बिना किसी ठोस आधार के की जा रही जांच" (fishing and roving inquiry) जैसा है और ACJM ने मामले को सही ढंग से खत्म किया था। त्रिपाठी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अजय बर्मन ने तर्क दिया कि किसी व्यक्ति का नाम भारतीय नागरिक बने बिना वोटर लिस्ट में शामिल होना संभव नहीं है।
याचिकाकर्ता ने जाली दस्तावेज और धोखाधड़ी की जांच की मांग की
उन्होंने कहा, "हम अदालत को यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा केवल जाली दस्तावेज़ या धोखाधड़ी से ही किया जा सकता था।" अदालत ने यह भी कहा, "आप यहां अदालत के सामने FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। यह मामला लगभग आधी सदी पुराना है। किसकी जांच होगी? आप मामले का दायरा बढ़ा रहे हैं।"
चुनाव आयोग से प्रमाणित दस्तावेज मिलने का वकील ने दिया हवाला
त्रिपाठी के वकील ने जवाब दिया कि याचिकाकर्ताओं को हालात की जानकारी थी और उन्होंने हाल ही में चुनाव आयोग से संबंधित दस्तावेज की एक कॉपी हासिल की है। वकील ने कहा, "हमने अब चुनाव आयोग से एक कॉपी हासिल कर ली है। हमने वोटर लिस्ट (roll) की कॉपी के लिए आवेदन किया था, और हमें प्रमाणित कॉपी दी गई।"
कोर्ट ने कहा- अभी सिर्फ नाम जोड़ने और हटाने की जानकारी
अदालत ने आगे कहा, "अभी तक, आप केवल नाम जोड़ने और हटाने की स्थिति के बारे में जानकारी दे रहे हैं।" शिकायतकर्ता के वकील ने तर्क दिया, "यह एक विदेशी नागरिक द्वारा दिए गए घोषणापत्र का मामला है। हम यह दिखाने में सक्षम हैं कि प्रथम दृष्टया गलत घोषणा की गई थी, और इसकी जांच होनी चाहिए।" सीनियर एडवोकेट ने कहा, "हम जाली दस्तावेजों और धोखाधड़ी की जांच की मांग कर रहे हैं।"
FIR से इनकार के आदेश के खिलाफ चल रही है सुनवाई
अदालत FIR दर्ज करने से इनकार करने वाले आदेश के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका (revision petition) पर सुनवाई कर रही है। त्रिपाठी ने शुरू में राउज एवेन्यू कोर्ट में ACJM के सामने सोनिया गांधी के खिलाफ एक अर्जी दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। (Source: ANI)
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