स्पाइसजेट और अजय सिंह ने केएएल एयरवेज विवाद में 140 करोड़ रुपये भुगतान का दिया आश्वासन
नई दिल्ली,(भारत)। स्पाइसजेट लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वे केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड और कलानिधि मारन को 140 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। यह भुगतान मध्यस्थता के फैसले से जुड़े मामले में किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने की।
45 दिनों के अंदर रजिस्ट्री में 50 करोड़ रुपये करेंगे जमा
सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट के वकील ने अदालत को 10 जुलाई को जमा किए गए एक अतिरिक्त हलफनामे के बारे में जानकारी दी। इसमें कहा गया है कि एयरलाइन और उसके प्रबंध निदेशक 45 दिनों के अंदर रजिस्ट्री में 50 करोड़ रुपये जमा करेंगे। इसके बाद अगले 90 दिनों में 90 करोड़ रुपये और जमा करने का वादा किया गया है। इस आश्वासन को स्वीकार करते हुए, हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट और अजय सिंह को 45 दिनों के भीतर 50 करोड़ रुपये की पहली किस्त जमा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इससे वे पहले दिए गए निर्देशों का पालन करने की अपनी गंभीरता दिखा सकेंगे। भुगतान की तय समय-सीमा पर नजर रखने के लिए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर, 2026 को तय की है।
अजय सिंह को मध्यस्थता में तय की गई राशि जमा करने का आदेश
अदालत ने स्पाइसजेट और अजय सिंह की ओर से मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई आगे के लिए टाल दी। इस याचिका में उन्होंने मध्यस्थता के फैसले को चुनौती दी है। अदालत ने कहा कि पहले जमा राशि से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा, उसके बाद ही इस चुनौती पर विचार किया जाएगा। भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मांगने वाला आवेदन तब दायर किया गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई, 2026 के अपने आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट के उस पहले के निर्देश में दखल देने से इनकार कर दिया था, जिसमें स्पाइसजेट और अजय सिंह को मध्यस्थता में तय की गई राशि जमा करने का आदेश दिया गया था।
केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड और कलानिधि मारन के पक्ष में आया फैसला
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पाइसजेट और अजय सिंह की ओर से अदालत में पक्ष रखा। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड और कलानिधि मारन का प्रतिनिधित्व किया। यह मामला केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड और कलानिधि मारन के पक्ष में दिए गए मध्यस्थता फैसले से जुड़ा है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रहने तक स्पाइसजेट और अजय सिंह को 144 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। (एएनआई)
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