त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों

त्योहारी सीजन से पहले चीनी स्टॉक पर सख्ती, 1,000 क्विंटल की सीमा तय

Sugar Stock Limit Set at 1,000 Quintals Ahead of Festive Season

नई दिल्ली [भारत]: त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों के लिए स्टॉक रखने के नियमों को सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत व्यापारियों के लिए चीनी का अधिकतम स्टॉक 1,000 क्विंटल तय किया गया है, जबकि स्टॉक रखने की अवधि 15 दिन तक सीमित कर दी गई है। सरकार का उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।

15 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि संशोधित नियम 15 अक्टूबर से लागू होंगे और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेंगे। यह फैसला 1 अक्टूबर से शुरू हुए नए चीनी सीजन और त्योहारी मांग में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लिया गया है।

मिल स्तर पर कीमतों में 28% की गिरावट

सरकार के अनुसार, मिल से बाहर चीनी की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और ये कीमतें पिछले तीन हफ्तों से स्थिर बनी हुई हैं। वहीं, खुदरा कीमतों में अगस्त के उच्चतम स्तर की तुलना में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। सरकार ने थोक और खुदरा विक्रेताओं से अपील की है कि वे मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का लाभ जल्द से जल्द उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।

15 दिन से ज्यादा स्टॉक रखने पर रोक

संशोधित नियमों के मुताबिक, चीनी व्यापारियों को स्टॉक प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों से अधिक समय तक चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी। देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापारी किसी भी समय और किसी भी स्थान पर 1,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।

कोलकाता और असम के लिए 2,000 क्विंटल सीमा

कोलकाता और उसके आसपास के महानगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ असम के लिए स्टॉक की सीमा 2,000 क्विंटल रखी गई है। मंत्रालय के मुताबिक, कोलकाता को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से आपूर्ति मिलती है और यह पूर्वी व उत्तर-पूर्वी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वितरण केंद्र है। वहीं, भौगोलिक और परिवहन संबंधी चुनौतियों को देखते हुए असम के लिए भी अधिक स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है।

जमाखोरी और कृत्रिम स्टॉक पर रोक का उद्देश्य

सरकार ने कहा कि नए नियमों का उद्देश्य वितरण श्रृंखला में चीनी के अनावश्यक संचय को रोकना है, ताकि मिलों से व्यापारियों और फिर उपभोक्ताओं तक इसकी आपूर्ति लगातार बनी रहे। इन उपायों के जरिए त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली मांग के दौरान सट्टेबाजी और कृत्रिम रूप से स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति को भी हतोत्साहित करने की कोशिश की गई है।

कम बारिश से गन्ने की आपूर्ति पर असर

इस बीच, अल नीनो के कारण कुछ गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अनियमित और कम बारिश से गन्ने की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सरकार ऐसे क्षेत्रों में गन्ने की उपलब्धता पर नजर रख रही है। चीनी मिलों को अपने क्षेत्रों की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। राज्य सरकारों से भी जमीनी परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित पर नजर

केंद्र सरकार ने कहा कि वह घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों की लगातार निगरानी करती रहेगी। साथ ही, सरकार ने कहा कि गन्ना किसानों के लिए उचित लाभ सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा।

(एएनआई)

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