दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्

दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सजा समीक्षा बोर्ड को 2 सितंबर से पहले फैसला लेने का निर्देश

Supreme Court of India

नई दिल्ली। बहुचर्चित ग्राहम स्टेंस हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रबींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (Sentence Review Board) को निर्देश दिया है कि वह याचिका पर जल्द से जल्द फैसला ले।

रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने दारा सिंह की याचिका पर फैसला लेने में हुई देरी पर कड़ी आपत्ति जताई है। दारा सिंह अपनी उम्रकैद की सजा के तहत 26 साल से अधिक का समय काट चुके हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा, "इस मामले को 2 सितंबर, 2026 को सूचीबद्ध किया जाए। सजा समीक्षा बोर्ड को इस पर निर्णय लेना चाहिए और हमें अवगत कराना चाहिए। फैसला लें अन्यथा हम खुद निर्णय लेंगे। हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते; कोई निर्णय नहीं लिया गया है।"

देरी पर अदालत ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि जब मामले को आखिरी बार स्थगित किया गया था, तब सजा समीक्षा बोर्ड पाल की याचिका पर विचार करने की प्रक्रिया में था। हालांकि, बोर्ड का कोई भी निर्णय अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया, जिस पर पीठ ने नाराजगी जताई। ओडिशा राज्य के वकील ने अदालत के समक्ष जेल निदेशालय का एक पत्र पेश किया, जिसमें कहा गया था कि जिला जेल, क्योंझार से एक रिपोर्ट का आना अभी बाकी है।

2 सितंबर तक फैसला लेने का आदेश

अदालत ने सजा समीक्षा बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह मामले की अगली सुनवाई यानी 2 सितंबर से पहले इस पर उचित निर्णय ले और अदालत को इसके परिणाम से अवगत कराए। गौरतलब है कि दारा सिंह को जनवरी 1999 में ऑस्ट्रेलियन क्रिश्चियन मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों फिलिप तथा टिमोथी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। इन तीनों को ओडिशा के मनोहरपुर गांव में उनकी स्टेशन वैगन के अंदर जिंदा जला दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद रखी बरकरार

वर्ष 2003 में एक निचली अदालत ने दारा सिंह को मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद, ओडिशा हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 में इस मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए कहा था कि यह मामला मृत्युदंड के योग्य "सबसे दुर्लभ" (rarest of rare) श्रेणी में नहीं आता है। इसके अलावा, दारा सिंह को ओडिशा में एक मुस्लिम व्यापारी शेख रहमान और ईसाई पादरी अरुल दास की हत्या के मामलों में भी अलग से दोषी ठहराया गया था। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का हलफनामा: नीट पेपर लीक प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को बताया सही