दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले प्रतिबंधों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कपिल सिबल ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली (भारत)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से पहले लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली एक तत्काल सुनवाई की। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने सर्वोच्च न्यायालय से पूछा, "मेरे देश को क्या हो रहा है?"
अदालत से मामले को तत्काल उठाने का आग्रह
सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी की ओर से पेश हुए सिबल ने दिल्ली जाने वाली ट्रेनों के रद्द होने, मेट्रो स्टेशनों के बंद होने, इंटरनेट पर प्रतिबंध और होटल बुकिंग पर रोक का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत से मामले को तत्काल उठाने का आग्रह करते हुए पूछा, "मेरे देश को क्या हो रहा है?" उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर एक याचिका दायर की गई है और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की पीठ से जुलाई में हुए सीजेपी विरोध प्रदर्शन से संबंधित अन्य मामलों के साथ आज ही इसकी सुनवाई करने का आग्रह किया। सिबल ने कहा, "सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, 57 मेट्रो स्टेशन बंद हैं, लोगों को होटलों में ठहरने से मना किया जा रहा है और निजामुद्दीन बंद कर दिया गया है। खबरों के अनुसार, आरडब्ल्यूए को लोगों को घर से बाहर न निकलने देने के लिए कहा जा रहा है। मेरे देश को क्या हो रहा है? यह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन है। इसे कैसे होने दिया जा सकता है?"
सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक दिल्ली और निजामुद्दीन की सभी ट्रेंन रद्द
उन्होंने आगे कहा कि कल सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं; हावड़ा, शालीमार और राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनें भी रद्द कर दी गई हैं। सिबल ने कहा, “ट्रेनें, मेट्रो, उबर, ओयो होटल, स्टेडियम। 10 अक्टूबर को दिल्ली में सख्त कार्रवाई की जा रही है।” उन्होंने यह भी बताया कि होटलों को मेहमानों को ठहराना बंद करने के लिए कहा गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमलया बागची और वी मोहना की पीठ ने सवाल किया कि याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख क्यों नहीं किया। सिबल ने कहा कि भारतीय युवा कांग्रेस की इसी तरह की एक याचिका वहां लंबित है, लेकिन उसे सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। न्यायमूर्ति बागची ने विरोध प्रदर्शन के आयोजक की अनुपस्थिति पर बार-बार सवाल उठाया और कहा कि बिना अनुमति के प्रस्तावित सभा गैरकानूनी हो सकती है।
सरकार पूरे शहर को बंद नहीं कर सकतीः शंकरनारायण
पीठ ने यह भी संकेत दिया कि किसी भी हस्तक्षेप में परस्पर विरोधी हितों को ध्यान में रखना होगा, जिसमें सभा को रोकने की संभावना भी शामिल है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी और गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि इन व्यापक उपायों की आनुपातिकता के लिए न्यायिक जांच की आवश्यकता है। सिंघवी ने 221 सीएपीएफ कंपनियों की तैनाती, 10 हिरासत केंद्रों की तैयारी, ट्रेन सेवाओं पर प्रतिबंध और अन्य पुलिसिंग उपायों का हवाला दिया। शंकरनारायण ने कहा कि सरकार पूरे शहर को बंद नहीं कर सकती क्योंकि वह प्रदर्शनकारियों को संभाल नहीं सकती।
सीजेपी को विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार
अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने सीजेपी को विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जबकि भारतीय युवा कांग्रेस ने एक निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने तर्क दिया कि भारी बैरिकेडिंग प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को अप्रभावी बना सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि दिल्ली उच्च न्यायालय से शुक्रवार को दोपहर 3 बजे इस मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया जा सकता है। सिबल और अन्य वकीलों ने आयोजक द्वारा दायर याचिका और आगे की जानकारी के साथ दोपहर 2 बजे लौटने पर सहमति जताई।
(इनपुटः ANI)
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