सुप्रीम कोर्ट ने 15 लाख से अधिक नागरिकों के कथित म

15 लाख लोगों के मेडिकल डेटा लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

Supreme Court Seeks Centre's Response on Alleged Medical Data Leak of 1.5 Million Indians

नई दिल्ली (भारत)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर केंद्र और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी किया, जिसमें कथित तौर पर बड़े पैमाने पर चिकित्सा डेटा लीक और साइबर हमले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। इस हमले में 15 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों के व्यक्तिगत और चिकित्सा रिकॉर्ड कथित तौर पर सिंगापुर स्थित एक सर्वर पर स्थानांतरित कर दिए गए थे।

नए सिरे से विधायी समीक्षा की आवश्यकता

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर की दलीलें सुनने के बाद प्रतिवादियों से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान, पीठ ने टिप्पणी की कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराधों के लिए नए सिरे से विधायी समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है।

शिकायत मार्च 2025 में ही हुई थी दर्ज

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने उल्लेख किया कि न्यायालय ने पहले भारत के सॉलिसिटर जनरल से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता की जांच करने का अनुरोध किया था। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया, कि कथित डेटा लीक की शिकायत मार्च 2025 में ही दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर अगस्त 2025 में दर्ज की। उन्होंने आगे बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा डेटा लीक के स्रोत और उस विदेशी सर्वर के बारे में जानकारी देने के बावजूद, जहां डेटा ट्रांसफर किया गया था, एफआईआर अभी भी अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज है।

मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित

याचिका के अनुसार, बेसेमर वेंचर पार्टनर्स द्वारा प्रवर्तित कंपनियां - रेमेडीनेट टेक्नोलॉजीज, आईएचएक्स, मेडि असिस्ट और परफियोस - कथित तौर पर इस घटना से जुड़ी हुई हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित डेटा लीक में 1.5 लाख से अधिक नागरिकों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी, जिसमें आधार कार्ड, पैन नंबर और मेडिकल रिकॉर्ड शामिल हैं, लीक हो गई है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित है। (इनपुट: एएनआई)

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