सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के डिजिटल डेटा पर गाजियाबाद पुलिस से मांगा जवाब
नई दिल्ली (भारत)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के डिजिटल डेटा को लेकर गाजियाबाद पुलिस से जवाब मांगा है। रोड-रेज मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ से उपाध्याय की डिजिटल जानकारी मांगी थी। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि जांच के लिए आखिर किस तरह की जानकारी की जरूरत है। साथ ही, कोर्ट ने डिजिटल जानकारी को सार्वजनिक नहीं करने का निर्देश दिया है।
‘X’ से मांगी जानकारी पर सवाल
कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस यह बताए कि रोड-रेज FIR या पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज किसी अन्य पुरानी FIR की जांच के लिए 'X' (ट्विटर) से किस तरह की जानकारी मांगी गई है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि ऐसी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। उपाध्याय को सुरक्षा देने वाले अंतरिम निर्देश लागू रहेंगे।
डिजिटल फुटप्रिंट की जांच पर आपत्ति
"गाजियाबाद के कमिश्नर एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट कर सकते हैं कि किस तरह की जानकारी की आवश्यकता है।" पत्रकार उपाध्याय, जिन्होंने राम मंदिर दान विवाद पर रिपोर्टिंग की थी। उन्होने आरोप लगाया कि रोड-रेज मामले में उनकी बहुत ज्यादा दखल देने वाली जांच की जा रही है। पुलिस मामले के लिए जरूरी सीमा से ज्यादा उनके डिजिटल फुटप्रिंट (डिजिटल गतिविधियों का रिकॉर्ड) मांग रही है।
पत्रकारिता के सोर्स की चिंता
उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से व्यापक डिजिटल जानकारी - जिसमें अकाउंट, IP और डिवाइस से जुड़ी जानकारी शामिल है - मांगने पर पुलिस का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी से पत्रकारिता के सूत्रों (सोर्स) का खुलासा हो सकता है।
डिजिटल डेटा मांगने पर सवाल
सीनियर वकील प्रदीप राय ने कहा कि पुलिस ने FIR दर्ज होने के बाद डिजिटल जानकारी मांगी थी। उन्होंने इसे एक सामान्य रोड-रेज या दुर्घटना का मामला बताते हुए ऐसी जानकारी की जरूरत पर सवाल उठाया। राय ने 22 और 23 अगस्त की रात निजामुद्दीन ईस्ट में दिल्ली के पूर्व मेयर फरहाद सूरी के घर पर कथित पुलिस छापे का भी जिक्र किया और कहा कि पुलिस की एक टीम कथित तौर पर वहां उपाध्याय की तलाश में गई थी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा डिजिटल जानकारी मांगने और इस्तेमाल करने के तरीके को नियंत्रित करने वाले दिशानिर्देशों की जरूरत है।
जांच और प्राइवेसी में संतुलन
"जांच एजेंसियों को संविधान के अनुसार काम करना होगा।" सीनियर वकील ने कहा, "मुझे सुरक्षा तो मिल रही है, लेकिन मेरा कहना है कि सभी के लिए कुछ गाइडलाइंस होनी चाहिए।" सुनवाई के दौरान, CJI सूर्यकांत ने आपराधिक जांच में टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा होने वाली मुश्किलों का ज़िक्र किया और कहा कि असरदार जांच और प्राइवेसी के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है।
टेक्नोलॉजी से जांच की चुनौती
कोर्ट ने कहा, "टेक्नोलॉजी की तरक्की से आरोपी, पीड़ित और एजेंसियों के सामने बहुत मुश्किल चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अगर वे साइंटिफिक तरीकों का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो उन पर खराब जांच का आरोप लगेगा। पीड़ित भी कहेगा कि आप फलां-फलां चीज़ की जांच नहीं कर रहे हैं। आरोपी प्राइवेसी के अधिकारों की बात करेगा। इसलिए कुछ संतुलन तो होना ही चाहिए।"
डिजिटल फुटप्रिंट की सीमा तय होगी
CJI ने कहा कि कोर्ट के सामने अभी सबसे ज़रूरी मुद्दा यह तय करना है कि जांच के दौरान पुलिस किसी व्यक्ति के डिजिटल फुटप्रिंट तक किस हद तक पहुंच सकती है। राय ने कहा कि पुलिस एक साल पुरानी डिजिटल जानकारी मांग रही है और ऐसी मांगों को आम बात बनने से रोकने के लिए गाइडलाइंस ज़रूरी हैं।
उपाध्याय के आरोपों का विरोध
रोड-रेज मामले में मूल शिकायतकर्ता (प्रतिवादी) की ओर से पेश वकील ने पुलिस के खिलाफ उपाध्याय के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उपाध्याय चाहते हैं कि उनके खिलाफ मामले की जांच के तरीके को रेगुलेट किया जाए, जबकि वे खुद अपने पत्रकारिता के काम में दूसरों पर बड़े-बड़े आरोप लगाते रहे हैं।
राम मंदिर रिपोर्टिंग पर सवाल
वकील ने अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर पर उपाध्याय की रिपोर्टिंग का ज़िक्र किया और कहा कि उन्होंने कथित तौर पर मंदिर के निर्माण में एक सरकारी इंजीनियर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिना सबूत के ऐसे आरोप लगाने से उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गलत तरीके से नुकसान नहीं पहुंच सकता जिसका नाम लिया गया है।
पत्रकारिता रेगुलेशन पर सवाल
उन्होंने कहा, "अगर वह पुलिस के रेगुलेशन की बात कर रहे हैं, तो पत्रकारिता के रेगुलेशन का क्या?" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या पत्रकारिता का मतलब किसी के भी खिलाफ मीडिया ट्रायल हो सकता है और कहा कि रोड-रेज मामले को बनावटी बताने का आरोप खुद जांच का विषय है।
X से डेटा की जरूरत बताने को कहा
प्रतिवादी के वकील ने कहा कि एक चश्मदीद गवाह ने रोड-रेज के आरोप का समर्थन करते हुए बयान दिया है और जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से यह बताने को कहा कि जांच को तार्किक नतीजे तक पहुंचाने के लिए X से मांगी गई डिजिटल जानकारी क्यों जरूरी है। उपाध्याय ने FIR रद्द करने या इसके विकल्प के तौर पर मामले की CBI जांच की भी मांग की है। (Source: ANI)
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