सुप्रीम कोर्ट ने देश की निजी एयरलाइंस की मनमानी और

एयरलाइंस के मनमाने किरायों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को फटकार

price regulation debate

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश की निजी एयरलाइंस की मनमानी और अनिश्चित हवाई जहाज किराये पर लगाम लगाने में विफल रहने को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने केन्द्र से पूछा है कि वह किराये के मामले में "मूकदर्शक" क्यों बनी हुई है और एयर लाइंस को ऐसा करने की अनुमति क्यों है?

नोटिस जारी, ‘शोषणकारी रवैये’ पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने हवाई जहाज किराये में मनमानी बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और कहा कि कोर्ट इस "शोषणकारी" रवैये में हस्तक्षेप करेगा। खासकर त्यौहारों के दौरान एयर लाइंस की मनमानी को लेकर।

हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

कोर्ट ने सरकार से 8 मई 2026 तक हलफनामा दायर करने को कहा है, जिसमें एयरलाइंस की अनिश्चित किराए वृद्धि को विनियमित करने की योजना मांगी गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में याचिकाकर्ता ने त्योहारों (जैसे कुंभ) के दौरान किराए में 3 गुना तक बढ़ोतरी और एयरलाइंस द्वारा बिना किसी रोक-टोक के नियम बदलने (जैसे बैगेज क्षमता कम करना) पर सवाल उठाए हैं।

बार-बार मौका, फिर भी जवाब नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये में मनमानी बढ़ोतरी को नियंत्रित करने की मांग वाली याचिका पर हलफनामा दाखिल न करने को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि तीन बार समय दिए जाने के बावजूद अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया, जो स्वीकार्य नहीं है।

पीठ ने मांगा जवाब

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र के वकील से पूछा कि हलफनामा दाखिल करने में क्या बाधा है। केंद्र की ओर से पश्चिम एशिया की स्थिति का हवाला दिया गया और कहा गया कि नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई और कहा कि बार-बार समय दिए जाने के बावजूद जवाब क्यों नहीं आया।

एक सप्ताह में जवाब देने का आदेश

पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल किया जाए और यह भी बताया जाए कि अब तक जवाब क्यों नहीं दिया गया और अतिरिक्त समय क्यों मांगा गया। अदालत ने तीन सप्ताह का और समय देने से इनकार कर दिया और कहा कि अगली सुनवाई 11 मई को होगी। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन ने दायर की है, जिसमें हवाई किराये और अतिरिक्त शुल्कों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा एक स्वतंत्र नियामक की मांग की गई है।

मनमानी और अतिरिक्त शुल्क पर सवाल

याचिका में कहा गया है कि निजी एयरलाइंस बिना ठोस कारण के किराये बढ़ाती हैं और अतिरिक्त शुल्क वसूलती हैं। इसमें यह भी आरोप है कि इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक-इन बैगेज सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दी गई है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। याचिका में कहा गया है कि एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए देश में फिलहाल ऐसा कोई प्राधिकरण नहीं है जो हवाई किराये या अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा या सीमा तय कर सके।

सुप्रीम कोर्ट की पहले भी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट पहले भी त्योहारों और आपात स्थितियों में किराये में भारी बढ़ोतरी को शोषण करार दे चुका है और केंद्र, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय तथा अन्य प्राधिकरणों से जवाब मांगा था।

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में कहा गया है कि अनियंत्रित किराया वृद्धि, सेवाओं में कटौती और पारदर्शिता की कमी नागरिकों के समानता, आवागमन की स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है, इसलिए इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

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