सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन और 'इंडि

कॉमेडियन समय रैना पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, लगाया 3 लाख का जुर्माना; जानें पूरा विवाद

Supreme Court slams comedian Samay Raina over insensitive remarks

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन और 'इंडियाज गॉट लेटेंट' (India's Got Latent) के होस्ट समय रैना को अदालत के आदेशों की अवहेलना करने और गुमराह करने की कोशिश पर कड़ी फटकार लगाई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए समय रैना और चार अन्य लोगों पर 3-3 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोका है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले दो हफ्तों के भीतर अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

विवाद की शुरुआत से सुप्रीम कोर्ट तक की क्रोनोलॉजी

  • विवाद की वजह: 'क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन' (Cure SMA India Foundation) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि समय रैना ने 'स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी' (SMA) जैसी गंभीर बीमारी के महंगे इलाज और दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities) को लेकर बेहद असंवेदनशील और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।
  • अदालत को दिया वचन तोड़ा: इससे पहले की सुनवाई में समय रैना ने कोर्ट को बाकायदा यह वचन (Undertaking) दिया था कि वे अपने शो में विशेष रूप से सक्षम (Specially Abled) लोगों को आमंत्रित करेंगे। लेकिन याचिकाकर्ता के मुताबिक, रैना इस वादे को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे।
  • शर्तों का उल्लंघन: फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि अदालती निर्देशों के बावजूद रैना ने न तो फाउंडेशन से कोई संपर्क किया और न ही एसएमए से पीड़ित मरीजों से।

"क्या युवाओं के आइकन हैं?" - कोर्ट रूम में तीखी बहस

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने समय रैना के आचरण पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने रैना के रवैये पर चिंता जताते हुए कहा, "मैं नहीं जानती कि वे युवाओं के लिए किस तरह के आइकन हैं। यह सोचकर ही मुझे डर लगता है।" इस पर सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमारे युवाओं के पास इससे कहीं बेहतर आइकन हैं।"

सॉलीसिटर जनरल ने समय रैना द्वारा 'इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन 2' में 'नींबू-मिर्ची' लटकाने के कृत्य पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "हाल ही में उन्होंने एक नया शो शुरू किया है। उन्होंने शुरुआत में कहा कि अब मैं कुछ ऐसा कर रहा हूं जो मैंने पिछली सीरीज में नहीं किया था, और उन्होंने नींबू-मिर्ची लटका दी। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह बिल्कुल साफ था कि उनका निशाना किस पर था और वे क्या कहना चाह रहे थे।"

इसके अलावा, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने रैना के हलफनामे में दिव्यांगों के लिए 'Disabled Persons' शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इसके स्थान पर 'Specially Abled Persons' (विशेष रूप से सक्षम) शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए।

"अगर यह अहंकार नहीं, तो ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी बदलनी होगी"

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाते हुए समय रैना को कड़ी नसीहत दी। सीजेआई ने टिप्पणी की, "सार्वजनिक जीवन में, आप दूसरों का जितना सम्मान करेंगे, आपको उतना ही सम्मान मिलेगा। आप लोगों को इस तरह अपमानित नहीं कर सकते।"  रैना के इस रवैये पर कि वे शायद देश से बाहर बैठकर कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं, सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में कहा, "वे सोचते हैं कि देश से बाहर बैठकर वे अदालत के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से परे हैं। अब उन्हें इसका खामियाजा भुगतने दीजिए। अगर यह अहंकार नहीं है, तो हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी को ही बदलना होगा।"

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने समय रैना के इस रवैये को 'मिसकंडक्ट' (दुराचरण) माना, जो रिकॉर्ड में हलफनामा न होने के बावजूद हलफनामा दाखिल करने का दावा करने से और गंभीर हो गया। कोर्ट ने कहा कि यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि आदेशों की अवहेलना की गई है, जिसके चलते 2 हफ्ते के भीतर 3 लाख रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया गया है।

शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने समय रैना और अन्य दोषियों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का मन बनाया था, लेकिन बाद में नरमी बरतते हुए इसे घटाकर 3-3 लाख रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि इस बात को मानने का पूरा आधार है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया और आदेशों का उल्लंघन किया, जिसे हलफनामे की गलत जानकारी देकर और गंभीर बना दिया गया। (भाषांतर: Ravi Pandey | इनपुट: ANI)

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