ताजमहल की यादों के साथ ईरानी नाविक सेल्फी, ताजमहल और खुशियां… फिर समुद्र में मौत का हमला
भारत में बिताए यादगार पल
विशाखापत्तनम के आर.के. बीच पर हल्की हवा चल रही थी। शाम ढल रही थी और समुद्र किनारे लोगों की भीड़ लगी थी। अलग-अलग देशों की नौसेनाओं के जवान वहां मौजूद थे। वे मुस्कुरा रहे थे, तस्वीरें खींच रहे थे और इस खूबसूरत पल को अपने कैमरों में कैद कर रहे थे। इन्हीं जवानों में ईरान की नौसेना के सैनिक भी शामिल थे। वे सेल्फी ले रहे थे, समुद्र किनारे टहल रहे थे और भारत के इस शहर की खूबसूरती का आनंद ले रहे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद इनकी कहानी एक दर्दनाक खबर बन जाएगी।
नौसैनिक अभ्यास में आए थे भारत
ईरानी नौसेना का युद्धपोत IRIS डेना भारत में आयोजित बड़े नौसैनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने आया था। यह जहाज अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास और फ्लीट रिव्यू में शामिल हुआ था, जहां कई देशों की नौसेनाएं एक साथ अभ्यास करती हैं। इस दौरान ईरानी नाविकों ने भारत में कई दिन बिताए। उन्होंने शहर घूमे, स्थानीय लोगों से बातचीत की और यहां की संस्कृति को करीब से देखा।
बाजारों में खरीदारी और भारतीय यादें
इन जवानों ने सिर्फ आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा ही नहीं लिया, बल्कि भारत की संस्कृति को भी महसूस किया। वे स्थानीय बाजारों में घूमे और कई चीजें खरीदीं। कई नाविकों ने अपने परिवार के लिए भारतीय साड़ियां और पारंपरिक कपड़े खरीदे। कुछ ने स्मृति चिन्ह लिए ताकि भारत की याद अपने साथ ले जा सकें। विशाखापत्तनम की मेहमाननवाजी और लोगों का अपनापन उन्हें बहुत पसंद आया।
ताजमहल और बोधगया की यात्रा
भारत प्रवास के दौरान इन सैनिकों ने कुछ ऐतिहासिक जगहों की सैर भी की। वे आगरा जाकर ताजमहल देखने पहुंचे और उसकी खूबसूरती को कैमरे में कैद किया। इसके अलावा कई जवान बोधगया भी गए, जहां उन्होंने शांत माहौल और धार्मिक महत्व वाले स्थलों को देखा। उनके लिए यह यात्रा यादों से भरी हुई थी।
वापसी के रास्ते में हुआ हमला
भारत से कार्यक्रम खत्म होने के बाद युद्धपोत IRIS डेना अपने देश की ओर लौट रहा था। लेकिन समुद्र में एक ऐसी घटना हुई जिसने सब कुछ बदल दिया। रिपोर्टों के मुताबिक रास्ते में इस जहाज पर अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि जहाज को गंभीर नुकसान हुआ और वह समुद्र में डूब गया।
कई जवानों की गई जान
इस हमले में बड़ी संख्या में नाविकों की मौत हो गई। खबरों के अनुसार कम से कम 87 सैनिकों की जान चली गई, जबकि करीब 32 नाविकों को बचा लिया गया। कुछ ही दिन पहले जो सैनिक भारत में घूम रहे थे, सेल्फी ले रहे थे और खुशियां बांट रहे थे, वही अब एक दर्दनाक हादसे का हिस्सा बन गए
यादें जो हमेशा रहेंगी
भारत में बिताए गए वे पल अब उन नाविकों की आखिरी खुशहाल यादों में बदल गए हैं। विशाखापत्तनम के समुद्र किनारे ली गई सेल्फियां, बाजारों की खरीदारी और ताजमहल की तस्वीरें अब उनके परिवारों के लिए अनमोल यादें बन गई हैं। समुद्र में हुआ यह हमला सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि उन जवानों की अधूरी रह गई कहानी भी है, जो कुछ दिन पहले तक जिंदगी के खूबसूरत पल जी रहे थे।
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