'मेड इन इंडिया' की वैश्विक उड़ान: हैदराबाद से निकला 400वां अपाचे फ्यूजलेज; अब देश में बनेगी घातक जेवलिन मिसाइल
नई दिल्ली। टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (TBAL) ने अपने हैदराबाद संयंत्र से एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर का 400वां फ्यूजलेज (विमान का ढांचा) रोल आउट कर दिया है। यह उपलब्धि भारत के तेजी से मजबूत होते एयरोस्पेस इकोसिस्टम और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में उसकी गहरी पैठ को दर्शाता है। यह 400वां ढांचा हैदराबाद स्थित 52,000 वर्ग मीटर में फैली आधुनिक विनिर्माण सुविधा में तैयार किया गया है। बोइंग और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) का यह संयुक्त उद्यम भारत में इन ढांचों का निर्माण कर उन्हें दुनियाभर के बेड़े में शामिल होने वाले अंतिम विमानों के लिए भेजता है।
अमेरिकी और भारतीय सेना की बढ़ा रहा ताकत
हैदराबाद में बने ये फ्यूजलेज अमेरिकी सेना के साथ-साथ उन छह अपाचे हेलीकॉप्टरों में भी इस्तेमाल किए गए हैं, जो वर्ष 2025 में भारतीय सेना को सौंपे गए थे। वर्तमान में भारतीय वायुसेना भी 22 एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों के आधुनिक बेड़े का संचालन कर रही है। साल 2016 में स्थापित इस संयुक्त उद्यम में आज 750 से अधिक इंजीनियर और तकनीशियन कार्यरत हैं। यह संयंत्र उन्नत रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और अत्याधुनिक एयरोस्पेस तकनीकों के जरिए अपाचे हेलीकॉप्टर के प्रमुख एयरफ्रेम स्ट्रक्चर तैयार करता है, जो वैश्विक मंच पर भारत की विनिर्माण दक्षता का स्पष्ट प्रमाण है।
जेवलिन मिसाइल बनाने के लिए हुआ अहम समझौता
रक्षा क्षेत्र में भारत की इस मजबूती को और विस्तार देते हुए पिछले सप्ताह एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और 'जेवलिन जॉइंट वेंचर'- जो कि रेथियॉन (Raytheon) और लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) की साझेदारी है- ने देश में ही जेवलिन 'ऑल अप राउंड' (AUR) मिसाइल के सह-उत्पादन के लिए एक सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
टाटा बना साझीदार, देश में लगेगा मिसाइल प्लांट
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, भविष्य में देश के भीतर जेवलिन के सह-उत्पादन के लिए कई कंपनियों की तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञता के गहन मूल्यांकन के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को मुख्य रणनीतिक साझेदार चुना गया। इस समझौते के तहत दोनों पक्ष भारत में एक समर्पित फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन प्लांट के साथ-साथ पुर्जों के निर्माण की क्षमताएं विकसित करेंगे। इसका मकसद भविष्य की उत्पादन मांगों को पूरा करना और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता को मजबूत सहारा देना है।
अमेरिका से आएंगे पुर्जे, भारत में बनेगी मिसाइल
यह सह-उत्पादन पहल अमेरिकी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को सीधे भारतीय असेंबली लाइनों से जोड़ती है। इसके तहत सब-असेंबली किट्स का बहुवर्षीय निर्माण अलबामा में लॉकहीड मार्टिन की ट्रॉय फैसिलिटी में होगा, जबकि गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट्स एरिज़ोना के टक्सन स्थित रेथियॉन संयंत्र में तैयार की जाएंगी। अमेरिका में तैयार इन महत्वपूर्ण कलपुर्जों को अंतिम असेंबली और इंटीग्रेशन के लिए भारत भेजा जाएगा। इस रणनीतिक मॉडल से भारत में उच्च-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, वहीं अमेरिका में रक्षा विनिर्माण से जुड़ी नौकरियां भी सुरक्षित रहेंगी। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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