विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एक कार्यक

संयुक्त राष्ट्र सुधारों का विरोध करने वालों को संगठन की परवाह नहीं, केवल इस्तेमाल कर रहे हैं: एस. जयशंकर

Those opposing UN reforms don't care about the organization, just using it: S. Jaishankar

न्यूयॉर्क (अमेरिका)। न्यूयॉर्क से मिली खबर के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार नहीं होने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हताशा लगातार बढ़ रही है और इन सुधारों का विरोध करने वाले देश इस वैश्विक संगठन का केवल इस्तेमाल कर रहे हैं तथा उन्हें इसकी वास्तव में कोई परवाह नहीं है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के इतर आयोजित एक मंत्रिस्तरीय सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के न्यूयॉर्क में जुटने पर सुधार का मुद्दा हर साल उठता है, लेकिन अब इसे लेकर भावना और अधिक मजबूत हो गई है।

लिखित मसौदे और लोकतांत्रिक तरीके से फैसले पर जोर

जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि अगर हम सुधार को लेकर वाकई गंभीर हैं तो लिखित मसौदे के आधार पर बातचीत होनी चाहिए क्योंकि बिना किसी मसौदे के बातचीत करना केवल समय खींचना है। उन्होंने कहा कि सुधार के लिए सर्वसम्मति जरूरी नहीं है क्योंकि लोकतंत्र में हम बहुमत और मतदान के जरिए फैसले करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग संयुक्त राष्ट्र की परवाह करते हैं, वे इसमें सुधार चाहते हैं, जबकि जो लोग सुधार का विरोध करते हैं, उन्हें वास्तव में इसकी परवाह नहीं है और वे केवल इसका उपयोग कर रहे हैं।

ग्लोबल साउथ और सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग

जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों में अब एक-दूसरे के साथ अधिक सहयोग करने और मिलकर काम करने की इच्छा दिखाई दे रही है, जिससे पुरानी निर्भरताएं टूट रही हैं और दुनिया अधिक लोकतांत्रिक बन रही है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और इसकी स्थायी एवं अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग करता रहा है। भारत का कहना है कि 1945 में गठित 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप नहीं है और यह मौजूदा भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।

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