टीएमसी सांसद सागरिका घोष का दावा, 23 विपक्षी दलों ने CJI को पत्र लिखकर न्यायिक जांच की मांग की
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने मंगलवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए 'हेरफेर' किया जा रहा है।
23 विपक्षी दलों ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र
घोष ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इस चुनावी प्रक्रिया की न्यायिक जांच के लिए 23 विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखा है। सागरिका घोष ने कहा है कि एनडीए (NDA) से इतर पूरा विपक्ष SIR प्रक्रिया को लेकर एकजुट है। उन्होंने कहा, ''एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 23 विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र लिखा है। यह न्यायपालिका की अंतरात्मा से एक अपील है कि किस तरह चुनावी प्रक्रियाओं और मतदान प्रणालियों में भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए हेराफेरी की जा रही है।''
'इंडिया ब्लॉक' की बैठक में तैयार हुई रूपरेखा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी पुष्टि की है कि 8 जून को 'इंडिया ब्लॉक' की बैठक में इस कदम की रूपरेखा तैयार की गई थी। इस पत्र पर आम आदमी पार्टी (AAP) और डीएमके (DMK) सहित 23 दलों और एक निर्दलीय सदस्य ने हस्ताक्षर किए हैं।
समान नागरिक संहिता के इरादों पर सवाल
चुनावी प्रक्रिया के अलावा, सागरिका घोष ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के समय और इसके उद्देश्य पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया, ''भाजपा जब भी कोई कानून लाती है, तो उसका मकसद सामाजिक अशांति फैलाना होता है। बिना आम सहमति और व्यापक परामर्श के हम इस यूसीसी का समर्थन नहीं कर सकते।''
पश्चिम बंगाल में यूसीसी का खाका तैयार
विपक्ष के हमलों के बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक दिन पहले ही 'सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026' पारित किया गया। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि राज्य समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जा चुका है और 2 जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष इसका मसौदा (ड्राफ्ट) रखा जाएगा।