उत्तर प्रदेश के गरीब तबकों की आय में हाल के महीनों

माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के ऋण से गरीब तबके की आय में सुधार दर्ज

माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के ऋण से गरीब तबके की आय में सुधार दर्ज

छोटे ऋण से ढाई साल में 19 लाख परिवार गरीबी से ऊपर उठे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गरीब तबकों की आय में हाल के महीनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और लोग छोटे कर्जों से परिवार को बेहतर जीवन प्रदान कर रहे हैं। यह बात माइक्रोफाइनेंस एमसीसिएशन द्वारा जारी एक रिपोर्ट में सामने आयी है।

उत्तर प्रदेश माइक्रोफाइनेंस एमसीसिएशन (उपमा) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के गरीब तबकों की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ढाई साल में प्रति व्यक्ति ऋण राशि में 16 फीसदी की वृद्धि हुई। यह इशारा करता है कि लोगों की आय क्षमता बढ़ी है और वे अधिक ऋण लेकर उसे चुका रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा माइक्रोफाइनेंस क्लाइंट्स की संख्या में जून 2024 में जून 2025 के बीच भारी गिरावट दर्ज की गई। उपमा से जुड़े नान बैंकिग फाइनेंस कंपनियां व माइक्रो फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी एमएफई) में यह संख्या 69.05 लाख से घटकर 50.12 लाख रह गई। करीब 19 लाख की गिरावट सकारात्मक संकेत है। इसका अर्थ है कि वे गरीची रेखा से ऊपर उठ चुके हैं। उनको जीवनयापन के लिए ऋण की आवश्यकता नहीं है।

उपमा रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2022 से जून 2025 के बीच माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं खासकर एनबीएफसी-एमएफआई और स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने राज्य में आर्थिक समावेशन व गरीबी उन्मूलन में प्रभावी भूमिका निभाई है। इस अवधि में औसत टिकट साइज यानी प्रति व्यक्ति ऋण राशि में लगातार वृद्धि हुई।

एनबीएफसी-एमएफआई के लिए यह राशि जून 2024 से जून 2025 के बीच 45.031 से बढ़कर 53,402 रुपये हो गई। अर्थात करीब 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए औसत टिकट साइज 49,426 से 55,816 रुपये तक पहुंचा, जो 11 प्रतिशत का इजाफा है। इससे स्पष्ट है कि लोगों की आय बढ़ी है।

रिपोर्ट के मुताबिक ऋण की डिफॉल्ट दरों में गिरावट आई है। दिसंबर 2014 में एनबीएफसी-एमएफआई की दर 10.64% थी, वह जून 2025 में घटकर 7.91% रह गई। इसी अवधि में स्मॉल फाइनेंस बैंकों की दर 16.50% से गिरकर 10.93% हो गई। यानी माइक्रोफाइनेंस में मिले ऋण ने लोगों को आय अर्जित करने में मदद की और उनकी भुगतान क्षमता बेहतर हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऋण लेकर छोटे व्यवसाय शुरू करने वाले लाभार्थियों ने नए आय स्रोत बनाए, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी और परिवारों में शिक्षा स्वास्थ्य पर निवेश बढ़ा।

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