उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में त्रिस्तरीय

यूपी में पंचायत चुनाव के बीच एसआईआर कराने को लेकर उठ रहे सवाल !

यूपी में पंचायत चुनाव के बीच एसआईआर कराने को लेकर उठ रहे सवाल ! 

त्रिस्तरीय पंचायत समय से कराना हुआ चुनौतीपूर्ण 

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तय हैं। इसके बावजूद केन्द्रीय चुनाव आयोग ने देश व्यापी गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान (SIR) में उत्तर प्रदेश को भी शामिल कर लिया है। ये स्थिति तब हो जब दिल्ली में पिछले दिनों राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों की बैठक में यह तय हुआ था कि उन राज्यों में एसआईआर नहीं होगा जहां जल्दी ही पंचायत या नगर निकाय चुनाव होने हैं ! फिर यूपी को इसमें शामिल कर लिया गया। इससे चुनाव ड्यूटी करने वाले बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) के सामने पंचायत चुनाव और एसआईआर की दोहरी जिम्मेदारी आन खड़ी होगी।

यूपी को विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में शामिल किए जाने से इसका असर पंचायत चुनाव की तैयारियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। लोकसभा - विधानसभा और पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूचियां अलग-अलग होती हैं। जबकि, इन सूचियों को अपडेट करने की जिम्मेदारी उठाने वाले निचले स्तर के कर्मचारी कॉमन हैं। इसलिए दिक्कतें आना तय माना जा रहा है। 

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल अप्रैल-मई में होने हैं। इन दिनों पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूचियों को अपडेट करने का काम चल रहा है। 1 जनवरी 2025 के आधार पर मतदाता सूची दुरुस्त करने के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। अब सभी एसडीएम डाटा चेकिंग के बाद इसे ऑनलाइन फीड करवाने का काम करेंगे। ।। मतदाता सूची का मसौदा (अनंतिम सूची) 5 दिसंबर को प्रकाशित होगा। जबकि, फाइनल सूची 15 जनवरी 2026 को प्रकाशित करने की. घोषणा की गई है।

पंचायत चुनाव की मतदाता सूचियों में उन युवा मतदाताओं को शामिल करने का अभियान भी चलेगा, जो 1 जनवरी 2026 को 18 साल के हो जाएंगे। इसी बीच 28 अक्तूबर से 7. फरवरी के बीच एसआईआर का काम पूरा करना होगा। जानकारों का कहना है कि दोनों ही तरह की मतदाता सूचियों के लिए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) कॉमन हैं, इसलिए काम का भार कम करने के तरीके भी निकालने होंगे। इसके लिए यह भी हो सकता है कि स्थानीय प्रशासन कुछ और बीएलओ देकर जिम्मेदारियों को बांट दें। 

ऐसे में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या पंचायत चुनाव टल सकते हैं ? पंचायतीराज विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि पंचायतीराज अधिनियम के अनुसार, ये चुनाव पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के छह माह पहले या बाद तक कराए जा सकते हैं। इसलिए छह माह से ज्यादा चुनाव टालने पर केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता रुक जाएगी। फिर यूपी में वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी पंचायत चुनावों को टालना मुमकिन नहीं होगा। इसलिए इन सब स्थितियों के बीच ही समाधान ढूंढने होंगे।